पीलीभीत। सालभर दावे और वादों में बीतने के बाद एक बार फिर मानसून के सिर पर आते ही प्रशासन की ओर से बाढ़ की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। जिले में पिछले साल जुलाई में आई बाढ़ से कई इलाकों में क्षतिग्रस्त हुए मार्ग और पुल-पुलियाें की स्थिति जस की तस है।
अफसरों की ओर से प्रस्ताव शासन में लंबित होने की बात कहकर किनारा किया गया है। इसको लेकर ग्रामीण सवाल कर रहे हैं, उनका कहना है कि पूर्व में आई बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी है। ऐसे में इस बार मानसून में अगर बाढ़ आती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
जिले में वैसे तो बरसात के दौरान देवहा और शारदा नदी हर साल उफनाती है। नेपाल से जनपद की सीमा में प्रवेश करने के बाद शारदा नदी कलीनगर और पूरनपुर क्षेत्र में नुकसान पहुंचाती है। पिछले साल भी नदी ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया था। इसके अलावा जुलाई में आई बाढ़ से माधोटांडा, शाहगढ़, कलीनगर, बीसलपुर, अमरिया आदि क्षेत्रों में प्रमुख मार्ग और पुल-पुलिया कई जगह से कट गईं थीं। मरम्मत को लेकर पूरा साल बीतने के बावजूद कोई काम नहीं हो सका। अफसरों की ओर से कार्य को मंजूरी न मिलने की दोहाई दी जाती रही और स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब बरसात का समय नजदीक आते ही बाढ़ को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। संवाद
बाढ़ बचाव कार्यों गुणवत्ता पर सवाल, पहाड़ों पर बारिश से घट- बढ़ रहा नदी का जलस्तर ः मानसून सक्रिय होने पर भले ही अभी एक माह का समय शेष हो, लेकिन पहाड़ों पर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। पूर्व में पहाड़ों पर हुई बारिश के बाद शारदा नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इससे पूरनपुर क्षेत्र के पैंटून पुल पर कई दिनों तक यातायात प्रभावित हुआ था। इसके साथ ही शारदा नदी पर कराए जा रहे बाढ़ नियंत्रण कार्य भी प्रभावित हुए थे। ग्रामीण जलस्तर बढ़ने से बाढ़ कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। करीब एक सप्ताह तक जलस्तर में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही थी।
अमरिया क्षेत्र के भगा मोहम्मदगंज का कटा पड़ा पुल का संपर्क मार्ग से बाॅस-बल्ली डालकर किया जा रह