पीलीभीत। सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर अब तक लक्ष्य के विपरीत मात्र 25 फीसदी ही खरीद हो सकी है। कारण यह है कि राइस मिलों और आढ़तियों ने 50 फीसदी से अधिक गेहूं की खरीद कर ली। ऐसे में शासन से मिला लक्ष्य कैसे पूरा होगा, इसको लेकर अफसर माथा-पच्ची करने में लगे हैं।
कोविड-19 के दृष्टिगत लागू लॉकडाउन में इस बार गेहूं खरीद एक अप्रैल के बजाए 15 अप्रैल से शुरू की गई थी। किसानों से गेहूं खरीद करने के लिए आठ क्रय एजेंसियों ने 125 क्रय केंद्र खोले हैं। पहले दिन अधिकारियों ने केंद्रों का निरीक्षण कर तेजी से खरीद करने के निर्देेश दिए थे। शुरूआत में तो क्रय केंद्रों पर तेजी से खरीद शुरू की गई। मगर, लॉकडाउन का फायदा उठाकर राइस मिलर्स ने किसानों से सीधे संपर्क कर बड़ी मात्रा में गेहूं की खरीद कर डाली। निजी तौर पर सर्वाधिक गेहूं खरीद पूरनपुर क्षेत्र में की गई। विभागीय अफसर इस बात से अंजान बने रहे। पूरनपुर क्षेत्र में एक क्रय केंद्र प्रभारी पर डीएम वैभव श्रीवास्तव के आदेश पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन गेहूं खरीद में होने वाली धांधली और लापरवाही पर अंकुश नहीं लग सका।
गुरुवार तक 41000 टन गेहूं की खरीद की जा सकी, जो कि लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 25 फीसदी ही है। इसके विपरीत आढ़त और राइस मिलों पर 50 फीसदी से अधिक गेहूं बिक चुका है। ऐसे में शासन द्वारा 1.79 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा होगा। इसे लेकर अफसर माथापच्ची करने में लगे हैं।
इस बार 15 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई है। 30 अप्रैल तक 41000 टन गेहूं खरीद हो चुकी है। खरीद बढ़ाने के लिए केंद्र प्रभारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. अविनाश कुमार झा, डिप्टी आरएमओ