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बाढ़ से बचाव के इंतजाम नहीं हुए, पीड़ित भगवान की शरण में पहुंचे

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पीलीभीत/माधोटांडा। शारदा नदी की बाढ़ से रोजाना हो रहे कटान को रोकने में सिंचाई विभाग नाकाम साबित हो रहा है। सरकारी मदद की उम्मीद छोड़ अब बाढ़ पीड़ित भगवान की शरण में पहुंच गए हैं। बाढ़ पीड़ित परिवार की महिलाओं ने नदी किनारे पहुंचकर पूजा अर्चना शुरू कर दी है। नलडेंगा क्षेत्र में नदी का कटान जारी है। शारदा कटान करती हुई उस मार्जनल बांध की ओर बढ़ रही है, जो शारदा सागर डैम की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। सिंचाई विभाग का शारदा सागर खंड अभी तक कटान देखने तक ही सीमित है। बचाव कार्य होता न देख घबराए ग्रामीणों ने अपने घरों का सामान समेटना शुरू कर दिया है।
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शारदा नदी के जलस्तर में बीते कई दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। नदी ने नलडेंगा क्षेत्र में दाहिने किनारे की ओर कटान शुरू कर दिया है। नदी के इसी किनारे पर ही मार्जनल बांध बना हुआ है। मौजूदा समय में जिस स्थान पर नदी से कटान हो रहा है, वहां से मार्जनल बांध की दूरी महज 200 से 300 मीटर ही रह गई है। नलडेंगा क्षेत्र में कटान रोकने के लिए पहले के वर्षों में नदी के भीतरी हिस्से में पत्थर की ठोकरें बनाई गई थीं। यह हर साल ही क्षतिग्रस्त होती जा रही थीं। नदी से कटान रोकने और बाढ़ पीड़ितों से बचाव की जिम्मेदारी शारदा सागर खंड की है, मगर खंड ने बरसात से पहले क्षतिग्रस्त तीन ठोकरों को दुरुस्त करने के प्रयास नहीं किए। नदी इन तीन ठोकरों को ही निशाना बनाए हुए है। ठोकरों को बचाने के लिए शारदा सागर खंड ने पिछले कई साल से ठोस इंतजाम नहीं किए। एसी बैग में रेत भरकर लगाने की खानापूरी की जाती रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी बरसात का शुरुआती दौर है। यदि ठोकरें नदी के कटान में कट गई तो मार्जनल बांध को भी कटने में देर नहीं लगेगी, क्योंकि नदी से मार्जनल बांध की दूरी बमुश्किल 300 मीटर ही रह गई है।
तमाम घर नदी के निशाने पर, सामान समेटना शुरू
शारदा नदी पिछले पांच दिन के भीतर करीब 20 बीघा से अधिक कृषि जमीन को निगल चुकी है। फिलहाल नदी के कटान से जयदेव सरकार के घर से पांच मीटर रह गई है। इनके अलावा मनोरंजन साना, कमल मजमुदार, विधान भवन की जमीनें भी कटती जा रही हैं। ऐसे में इन बाढ़ पीड़ितों ने अपने घरों से सामान समेटना शुरू कर दिया है। बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि यदि पत्थर की ठोकरें न होती, तो पूरा इलाका ही खत्म हो गया होता। नदी के तेज कटान से घबराए ग्रामीण खेतों खड़े पेड़ों को काटने के अलावा झांड़ झंकाड़ डालकर कटान रोकने को प्रयासरत हैं।
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मार्जनल बांध कटा तो होगी भारी तबाही
नलडेंगा क्षेत्र में उस स्थान पर शारदा नदी कटान रही है, जहां से मार्जनल बांध बहुत नजदीक है। मार्जनल बांध प्रदेश के 20 से अधिक जनपदों में कृषि फसलों की सिंचाई के लिए पानी देने वाले शारदा सागर डैम की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। अगर नदी के तेज कटान से मार्जनल बांध कटता है तो शारदा डैम भी खतरे में पड़ सकता है।
सरकार ने नहीं ली सुधि तो पीड़ितों ने शुरू की पूजा अर्चना
गभिया सहराई। शारदा सागर खंड द्वारा नलडेंगा में नदी के कटान से बचाव के लिए बाढ़ नियंत्रण न होने से बाढ़ पीड़ित परिवार की महिलाएं परेशान हैं। नदी किनारे रहने वाले परिवार की शिखा बरोई, वनमाला ढाली, प्रमिला मजूमदार, माधुरी ढाली, नमिता सरकार, रेखा मंडल आदि ने शारदा नदी के किनारे पहुंचकर पूजा अर्चना की और भगवान से बाढ़ आपदा जैसी दैवीय प्रकोप से सबको बचाने की प्रार्थना की। इधर, रविवार शाम एसडीएम कलीनगर रामदास नदी से कटान के हालात को देखने पहुंचे। ग्राम प्रधान परितोष राय और शंकर राय ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन भेजकर मदद की गुहार लगाई है।
नलडेेंगा क्षेत्र में शारदा के कटान की सूूचना पर अभियंताओं की टीम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गई थी। वहां बनी ठोकरों की मरम्मत कराई जाएगी। बाकी बचाव कार्य भी कराए जाएंगे, ताकि नदी का कटान रोका जा सके। - हरिश्चंद्र यादव, अधिशासी अभियंता, शारदा सागर खंड
नेताओं का बाढ़ पीड़ित गांव शेखापुर पहुंचना जारी
पीलीभीत। देवहा नदी का जलस्तर बढ़ने से बरखेड़ा क्षेत्र के गांव शेखापुर के समीप तीन दिन पूर्व नदी में कटान तेज हो गया था। यहां बाढ़ खंड द्वारा क्रेटस में एसी बैग भरकर लगाए जा रहे हैं। शेखापुर में शारदा के कटान को देखने के लिए विधायक और पूर्व मंत्री में होड़ मची है। दोनों का विधानसभा क्षेत्र एक ही है। एक दिन पूर्व बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत ने पहुंचकर नदी कटान के हालात देखे थे। इधर, सोमवार को सपा सरकार में मंत्री रहे हेमराज वर्मा ने भी शेखापुर पहुंचकर नदी से होने वाले कटान को देखा और ग्रामीणों की हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।
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