जिले में पुलिस टीम पर हमला होने की वारदातों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले ही नशे में युवकों ने सिपाहियों को पीटा था। बृहस्पतिवार को एक और मामला सामने आ गया। हालांकि इस बार गलती पुलिस की थी उसे दबिश देने के लिए पीड़ित पक्ष के लोगों को नहीं ले जाना था। ग्रामीण भी तभी भड़के जब पकड़े गए युवकों को पुलिस के साथ आए लोग गांव वालों के सामने ही पीटने लगे। चोरी के मामले में सुरागरसी के दौरान सामने आए संदिग्धों की धरपकड़ के लिए टीम आधी अधूरी तैयारी से पहुंची। खास बात रही कि दियोरिया पुलिस ने पूरनपुर पुलिस कोतवाली क्षेत्र के गांव में दबिश देने से पहले स्थानीय पुलिस को कोई सूचना नहीं दी। वहां का कोई पुलिसकर्मी दबिश के दौरान साथ नहीं ले जाया गया। सिर्फ पीड़ित के परिवार के चंद लोगों को लेकर नियमों को ताक पर रखकर दियोरिया पुलिस के दरोगा रूरिया सलेमपुर गांव पहुंच गए। यहां भी ग्रामीणों की मानें तो उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। पुलिस के साथ आए प्राइवेट लोगों ने जब पकड़े गए युवकों को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। तब उनका आक्रोश दिखाई दिया। इसके बाद भी मामला इतना तूल न पकड़ता। गांव के लोगों ने खुद ही डायल 100 पर इसकी जानकारी दी थी, लेकिन साथ आए लोगों पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ जुटता देख फायरिंग कर दी। जिससे पूरा गांव पुलिस के खिलाफ जमा हो गया और फजीहत कराने के बाद पुलिस को बचकर निकलना दूभर हो गया। बड़ा मामला होने के बाद भी इसकी सूचना अफसरों को काफी देरी से दी गई। वारदात के बाद कोतवाली पूरनपुर पुलिस ने इस बात को लेकर दियोरिया पुलिस से ऐतराज भी जताया। ऐसे में एक बार फिर अफसरों की ओर से दिए जा रहे दिशा निर्देशों को थाना पुलिस द्वारा पलीता लगाने की हकीकत सामने आ गई है।
2013 से अब तक कई बार हुए खाकी पर हमले
चंद दिन पहले ही कार सवार नशे में धुत तीन दबंगों ने माधोटांडा क्षेत्र में सिपाहियों से मारपीट की थी। इससे पहले खनन माफियाओं ने कोतवाली में तैनात सिपाही अनिल कुमार को दौड़ाकर पीटा। जिसका मुकदमा दर्ज है, लेकिन पुलिस चंद आरोपियों को ही पकड़ने में कामयाब रही। इससे पहले पूरनपुर में गश्त के दौरान एचसीपी राजेश यादव पर सड़क पर पथराव कर रहे एक युवक ने हमला कर दिया था। जिसमें उनकी ही रिवाल्वर से उनको गोली मार दी गई। जिसमें उनकी मौत हो गई थी। 2015 में तत्कालीन एसएचओ सुनगढ़ी बृजेश सिंह पर हादसे के बाद जाम लगाकर नारेबाजी कर रही भीड़ ने हमला बोला। जिसमें सिपाहियों को पीटने के बाद एसएचओ से धक्का मुक्की और असलहा छीनने का प्रयास किया गया। टनकपुर हाईवे पर कस्बा पुलिस चौकी में नशे में धुत दो युवकों ने सिपाहियों को पीटकर तोड़फोड़ की। पिछले साल एक आरोपी को पकड़ने गई सेहरामऊ उत्तरी पुलिस पर पथराव किया गया। पंचायत चुनाव की दोबारा मतगणना कराने की मांग पर प्रदर्शनकारियों ने कचहरी तिराहे पर तत्कालीन कोतवाल संग्राम सिंह से हाथापाई की थी। जिसमें तत्कालीन एसओ इंद्र कुमार व तीन सिपाही घायल हो गए थे। 2015 में ही ठेका पुलिस चौकी पर जाकर दबंग ने वहां रखा सारा फर्नीचर तोड़ दिया। 2014 में अमरिया से विभागीय कार्य को आए सिपाही पर जिला अस्पताल गेट पर दबंग ने बांके से हमला किया और दो सौ मीटर तक दौड़ाया। इसी साल शराब पकड़ने को गई बरखेड़ा पुलिस पर हमला बोला गया। जिसमें तत्कालीन एसओ दलवीर सिंह समेत पूरा स्टाफ घायल हुआ। साल 2013 में पशु तस्करों ने सिटी कंट्रोल रूम की गश्ती जीप को ट्रक से कुचल दिया। जिसमें सिपाही गजराज और अंकित की मौत हो गई थी। इसके अलावा भी पुलिस पर हमले के कई मामले सामने आ चुके है।