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निजीकरण का विरोध: वरुण गांधी बोले- बैंकों के घाटे के लिए कर्मचारियों को दोष देना ठीक नहीं

Fri, 17 Dec 2021 05:17 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क/डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, पीलीभीत

सार

एनपीए वसूली में केवल बैंकों की विफलता को आधार मानकर, बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है। 
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वरुण गांधी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश के सरकारी बैंकों के नौ लाख से ज्यादा कर्मचारी दूसरे दिन शुक्रवार को भी हड़ताल पर रहे। इससे सरकारी बैंकों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ और अनुमान है कि इससे अब तक 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हो चुका है। कर्मचारी सरकारी बैंकों के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भी कर्मचारियों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा है कि बैंकों के बढ़ते घाटे के लिए सरकारी बैंकों के कर्मचारियों को दोष देना ठीक नहीं है। सरकार को बैंकों का निजीकरण रोकना चाहिए।

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वरुण गांधी ने बैंक कर्मचारियों के हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को एक के बाद एक दो ट्वीट किये और कर्मचारियों के हक में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि देश के सरकारी बैंकों में लगभग 10 लाख कर्मचारी काम करते हैं और वे केवल लाभ के लिए काम नहीं करते हैं, बल्कि इसके जरिये सूक्षम, लघु और माध्यम उद्योगों, गरीब लोगों को कर्ज भी देते हैं और सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों के निजीकरण के लिए बैंकों के बढ़ते घाटे के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए।

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