- पहले दिन ग्राम पंचायत की ओर से की गई चादरपोशी
- जायरीन के पहुंचने का सिलसिला जारी
- 28 को चादर जुलूस के बाद समापन 29 को
सूफी संत सैय्यद सेल्हा मियां रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स का शुक्रवार को आगाज हो गया। इस दौरान जायरीन ने चादरपोशी कर दुआएं मांगीं। वहीं दूरदराज से आने वाले जायरीन के पहुंचने का सिलसिला भी पूरे दिन जारी रहा।
टाइगर रिजर्व से सटे सेल्हा गांव स्थित सेल्हा मियां की दरगाह शरीफ पर कुरानख्वानी के साथ उर्स का आगाज हुआ। सेल्हा ग्राम पंचायत की ओर से दरगाह शरीफ पर चादरपोशी की गई। चादरपोशी करने वालों में गोविंद ढाली, सर्वजीत सिंह, सोनू, सुक्खी, अशोक मंडल, दुलाल आदि शामिल रहे। दूरदराज से आए जायरीन ने भी पहुंचकर चादरपोशी की और दुआएं मांगीं। उधर, नायब मेला मैनेजर मोहम्मद सद्दीक ने बताया कि पांच दिवसीय उर्स का समापन 29 मार्च को होगा। 28 मार्च को चादर जुलूस निकाला जाएगा। रोजाना रात को मिलाद के बाद बज्म ए शमा कव्वाली प्रोग्राम होगा।
सिंचाई विभाग की हटधर्मी के चलते जायरीन परेशान
सेल्हा बाबा की दरगाह तक पहुंचने के लिए जायरीन हरदोई ब्रांच के बाएं ओर पटरी पर बने पक्के मार्ग से ही आते जाते हैं, लेकिन इन दिनों यह मार्ग जायरीन के लिए मुसीबत बना हुआ है। हरदोई ब्रांच से निकाली जा रही रेत इसी पटरी पर डाली जा रही है। हालांकि मेला कमेटी के पदाधिकारियों ने सहायक अभियंता केपी तिवारी से रेत न निकलवाने का आग्रह भी किया था, लेकिन रेत निकालना बदस्तूर जारी है। जिसके चलते जायरीन को धूल के गुबार के बीच ही निकलना पड़ रहा है।
दुकानदारों में फैली नाराजगी
मेले में स्थानीय दुकानदारों के अलावा गैर जनपदों से भी बड़ी संख्या में दुकानदार यहां पहुंचते हैं। कमेटी पदाधिकारियों द्वारा इन्हें जमीन आवंटित की जाती है। उधर, कमेटी ने कुछ पुराने दुकानदारों के दुकान लगने के स्थान में बदलाव किया, जिस पर दुकानदारों में रोष फैल गया। उनका कहना था कि जो दुकानदार अधिक रकम दे रहे हैं, उनको कमेटी के लोग अच्छी जगह दे रहे हैं।