पीलीभीत। यूरिया की किल्लत दूर करने के लिए शासन की अनुमति मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने रिजर्व स्टॉक से 15 हजार टन यूरिया निकल ली। यह यूरिया सभी साधन सहकारी समितियों को भेजी गई है। यूरिया की किल्लत की वजह से अफसर परेशान थे। ग्रामीण इलाकों में यूरिया की कालाबाजारी भी हो रही थी। अब कृषि और सहकारी विभाग के अफसरों का कहना है कि किसानों केे यूरिया की दिक्कत नहीं होगी।
जनपद में खरीफ सीजन का रकवा 1,43,431 हेक्टेयर है। इसमें 1,41,555 रकवे पर धान की फसल, जबकि गन्ने का रकवा भी ठीकठाक है। यूरिया की खपत इस बार अनुमान से अधिक हो गई। अब तक जनपद में 80,116 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हो चुकी है। इसमें से सहकारी समितियों से 18,583 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया है। पिछले वर्ष 21 अगस्त तक इन समितियों से 17,150 मीट्रिक टन यूरिया का ही वितरण कराया गया था। इसके बावजूद बीते दिनों यूरिया की किल्लत से किसानों को जूझना पड़ा। इसे लेकर सहकारी समितियों पर किसानों ने हंगामा भी किया था।
यूरिया की कमी को दूर करने के लिए सहकारिता विभाग ने रिजर्व स्टॉक से खाद निकालने का मन बनाया। रिजर्व स्टॉक में नौ हजार मीट्रिक टन यूरिया रहती है। इसका 35 प्रतिशत हिस्सा खरीफ सीजन में निकाला जा सकता है। उससे पहले तीन हजार मीट्रिक टन यूरिया निकाली जा चुकी थी। बकाया यूरिया रबी के सीजन के लिए नवंबर में निकाली जा सकती है। मगर अचानक कमी को देखते हुए रिजर्व स्टॉक से और यूरिया निकाली जानी थी। इसके लिए डीएम के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया था। शासन ने 50 प्रतिशत तक यूरिया निकालने की अनुमति दे दी। 35 प्रतिशत में तीन हजार मीट्रिक टन यूरिया पहले निकाली जा चुकी थी। अब शासन की अनुमति पर 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया रिजर्व स्टॉक से और निकाली गई है। एआर कोऑपरेटिव वीर विक्रम सिंह ने बताया कि यूरिया की कमी अब कहीं नहीं है। रिजर्व स्टॉक से यूरिया निकालकर सभी समितियों पर भेज दी गई है। किसान सहकारी समितियों से यूरिया ले सकते हैं।
उपकृषि निदेशक ने परखा यूरिया का स्टॉक और डिमांड
पीलीभीत। यूरिया की किल्लत को लेकर शोर मचने के बाद शुक्रवार को बरेली से उप कृषि निदेशक डॉ. उदयप्रताप सिंह टीम के साथ पीलीभीत पहुंचे। उन्होंने कृभको के गोदाम पर जाकर यूरिया की उपलब्धता को चेक किया। पूरनपुर के रंपुरा फकीरे, शहर के अग्रवाल खाद भंडार पर भी गए। उन्होंने यूरिया की उपलब्धता और डिमांड के बारे में जाना। इसमें वर्तमान में यूरिया की डिमांड कम होने की बात सामने आई। उन्होंने स्टॉक भी चेक किया।
समितियों ने स्टाफ के ही नाम खरीद ली थी यूरिया, जवाब मांगा
बीते दिनों यूरिया की किल्लत होने पर कालाबाजारी के शक में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इसमें डीडी कृषि, तहसीलदार, एडीओ कोऑपरेटिव शामिल किए गए थे। 20 किसानों का भी सत्यापन कराया गया था। तीन सदस्यीय कमेटी की जांच पूरी हो गई है। इस जांच में सामने आया कि समितियों ने ही अपने स्टाफ और परिवार के लोगों के नाम से यूरिया खरीद ली थी। समितियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। पूछा गया है कि आखिर यूरिया खरीदने के बाद किस तरह से किसानों को दी गई। उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस मामले में अभी पड़ताल चल रही है। जल्द परिणाम पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा।