पीलीभीत। अनुमति की आड़ में हरे पेड़ों को काटने का सिलसिला जारी है। शहर में कलक्ट्रेट और कचहरी से चंद कदम पर दो दिनों से आम के हरे पेड़ों का सफाया किया जा रहा है। पेड़ों को काटकर लकड़ी को ट्रकों में भरकर भेजा जा रहा है। वहीं, अधिकारी अनुमति होने का हवाला देकर चुप्पी साधे हुए हैं।
हर साल पौधरोपण के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया जाता है। पेड़ों को लगवाने के साथ उनके संरक्षण को लेकर भी आदेश दिए जाते हैं, लेकिन जिले में हरियाली को बढ़ाने के प्रयास सिर्फ दावों तक सीमित हैं। फलदार संरक्षित पेड़ों का भी खुलेआम सफाया किया जा रहा है। इसके लगातार मामले भी सामने आ रहे हैं।
कलक्ट्रेट और कचहरी के निकट बाग में खड़े आम के हरे पेड़ों का सफाया पिछले दो दिनों से जारी है। बृहस्पतिवार को अधिवक्ताओं के रोष के बाद सामाजिक वानिकी टीम मौके पर भी गई थी, लेकिन औपचारिकताएं निभाने के साथ शुक्रवार को भी पेड़ों का कटान जारी रहा।
सामाजिक वानिकी के डीएफओ भरत कुमार ने बताया कि कचहरी के निकट काटे जा रहे पेड़ों की जांच कराई गई। इसमें 44 पेड़ों को काटने की अनुमति लेने की बात सामने आई है।