पीलीभीत। उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षरों को शिक्षित करने की तैयारी शुरू हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी परिषदीय विद्यालयों को निर्देश जारी करते हुए सर्वे और जागरूकता अभियान तेज करने को कहा है।
उल्लास योजना के तहत प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में एक सर्वेयर नामित किया जाएगा। इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर शिक्षामित्रों को जिम्मेदारी दी जाएगी। जहां शिक्षामित्र उपलब्ध नहीं होंगे, वहां सहायक अध्यापक यह कार्य संभालेंगे। सर्वेयर का दायित्व अपने क्षेत्र में कम से कम 15 ऐसे निरक्षरों का चिह्नांकन करना होगा, जिन्हें पढ़ना-लिखना और अंक ज्ञान नहीं आता है। उनका डेटा उल्लास एप पर अपलोड करना होगा।
बीएसए रोशनी सिंह ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत रैलियां, नुक्कड़ नाटक और विद्यालय की दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। निरक्षरों को शिक्षित करने के लिए स्वयंसेवकों की अहम भूमिका होगी। इसमें कक्षा पांच से ऊपर के मेधावी छात्र, एनसीसी, एनएसएस, डीएलएड व बीएड के विद्यार्थी, स्वयं सहायता समूह की शिक्षित महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल किए जाएंगे। इन सभी को जिला व ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
200 घंटे की कक्षाएं संचालित होंगी
चिह्नित निरक्षरों के लिए करीब 200 घंटे की कक्षाएं संचालित होंगी, जिनमें प्रतिदिन लगभग दो घंटे शिक्षण कराया जाएगा। इसके बाद सितंबर 2026 और मार्च 2027 में साक्षरता परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। परीक्षा में सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। संवाद