नेशनल हाइवे 30 पर शनिवार की रात गांव बरातबोझ के पास दो ट्रक अगल-बगल में फंस गए, जिससे हाइवे पर दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं। 12 घंटे बाद गड्ढों में फंसे वाहनों को क्रेन से निकाला जा सका। तब जाकर आवागमन शुरू हो सका। पूरी रात वाहन फंसे रहने से यात्रियों को काफी दिक्कतें हुईं।
शनिवार की रात करीब 11 बजे नेशनल हाइवे 30 पर गांव बरातबोझ के पास एक ट्रक गड्ढों में फंस गया। इसी बीच फंसे ट्रक को क्रासर करते समय दूसरा ट्रक भी उसी ट्रक के बगल से फंस गया। जिससे हाइवे पर वाहनों के पहिए थम गए। देखते ही देखते दोनों साइडों में वाहनों की कई किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। जाम में कई यात्री बसें भी फंस गई। जिससे बसों में सवार यात्रियों और उनजके बच्चों को भूखे-प्यासे रात गुजारनी पड़ी। सुबह मौके पर पहुंची पुलिस ने करीब 10 बजे क्रेन से दोनों ट्रकों को बाहर निकलवाया। तब जाकर जाम खुल सका।
सितारगंज-मझोला मार्ग
पर ग्रामीणों का धरना
मझोला। सितारगंज-मझोला मार्ग पर ओवरलोड वाहनों का संचालन चेतावनी के बाद भी बंद किए जाने के विरोध में रविवार को क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन के बाद धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सुबह सात बजे से 11 बजे तक किसी भी वाहन को संबंधित मार्ग से गुजरने नहीं दिया। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए भारी वाहन चालक अपने वाहन को दूसरे मार्गों से होकर ले गए।
सितारगंज-मझोला मार्ग पर रात दिन उत्तराखंड की ओर से आने वाले भारी वाहन गुजरते हैं। इसके चलते करीब एक साल से यह मार्ग बुरी तरह डैमेज हो चुका है। मार्ग पर कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिसमें आए दिन वाहन फंस जाते हैं और लोगों को आवागमन में खासी परेशानी होती है। क्षेत्रीय ग्रामीण इसका लगातार विरोध करते आ रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों से शिकायत के बाद भी जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने शनिवार को सैकड़ों लोगों का हस्ताक्षरयुक्त पत्र जिलाधिकारी को सौंप संबंधित मार्ग पर भारी वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। साथ ही रविवार को संचालन बंद न होने पर धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसके बाद भी सुबह कुछ एक ओवरलोड वाहन मार्ग से गुजरे। इससे आक्रोशित क्षेत्रवासी मंजीत सिंह, जगजीत सिंह, इकबाल सिंह, प्रधान दलवीर सिंह, बलजिंदर सिंह व क्षेत्र पंचायत सदस्य जीत सिंह आदि की अगुवाई में बिरहनी स्थित बड़ा गुरुद्वारे के निकट इकट्ठा हुए तथा वहीं से जुलूस की शक्ल में मार्ग पर पहुंच धरना-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। दोपहर बाद सीओ जहानाबाद निर्मल कुमार ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर तीन चार दिन के भीतर भारी वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आश्वासन दिया, तब जाकर आंदोलनकारी माने।