शाहगढ़ की घटना को लेकर रविवार के उलमा और अन्य लोगों ने सीओ राजेश्वर सिंह से मिलकर मदरसा में नमाज पढ़ने पर पाबंदी पर रोष व्यक्त किया। इससे पहले सुन्नी उलामा कौंसिल की हुई बैठक में शाहगढ़ की घटना और धर्म के नाम पर आजादी होने के बावजूद धर्म के नाम पर पाबंदी पर रोष व्यक्त किया गया।
मोहल्ला खानकाह में कौंसिल के राष्ट्रीय महासचिव हाफिज नूर अहमद रजा अजहरी के आवास में बैठक हुई। बैठक मेें कहा गया कि धर्म के नाम पर आजादी होने के बावजूद धर्म के नाम पर एक ही पक्ष के लोगों को पाबंद किया जा रहा है। खुफिया विभाग की टीमें भी एक समुदाय के धार्मिक स्थलों की खोज मेें रहती हैं। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। धर्म अमन शांति का पैगाम देता है। मदरसे और मस्जिद इबादत गाहें हैं। नमाज चाहे मस्जिद में हो या मदरसे में एतराज क्यों किया जा रहा है। इबादत गाहों के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। बैठक में हाफिज नूर अहमद रजा अजहरी, मौलाना साजिद हसनी, मौलाना अलीजान नूरी, हाफिज साकिब रजा, कारी शान रजा, हाफिज कमर महबूब अजहरी, मौलाना नूर मोहम्मद हसनी, हाफिज मुश्ताक नूरी, हाफिज जकी खान, हाफिज जाकिर खान नूरी, हाफिज अशफाक, ताबिश, हाफिज साकिब रजा आदि थे। बैठक में शाहगढ़ से आए लोगों ने घटना की पूरी जानकारी दी। बैठक के बाद उलमा और अन्य लोगों से सीओ से मिलकर शाहगढ़ मदरसा में नमाज पढ़ने से लगाई गई पाबंदी हटाने की मांग की। सीओ का कहना था कि अब तक आपसी सहमति से मदरसा में नमाज हो रही थी। गांव के लोगों की आपसी सहमति से ही नमाज हो सकती है।