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राइस मिलर और एफसीआई के बीच खींचतान बढ़ी

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पीलीभीत। धान खरीद के बाद अब चावल उतार को लेकर समस्या बढ़ती जा रही है। राइस मिलों से भेजे जा रहे चावल को मानक पर खरा न उतरने की बात कहकर रिजेक्ट करा दिया गया है। वहीं राइस मिलर पूरे मामले को एफसीआई के भ्रष्टाचार से जोड़कर बता रहे हैं। ऐसे में चावल का उतार ठप हो गया है। 3500 लाटों में करीब एक लाख टन चावल उतार के इंतजार में है। राइस मिलर भी लंबित लाटों का उतार होने के बाद ही नई लाट भेजने की बात पर अड़ गए हैं। इसे लेकर पूरे दिन राइस मिलर्स की हड़ताल का शोर मचा रहा। राइस मिलर और एफसीआई के बीच चल रही खींचतान को लेकर अफसर भी पसोपेश में हैं। खाद्य एवं विपणन विभाग के अधिकारियों ने समाधान के लिए आलाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। फिलहाल अभी समस्या हल होती नहीं दिख रही।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान को संबंधित राइस मिल में भिजवाया जाता है। राइस मिलों में इसका चावल तैयार होता है और फिर चावल को एफसीआई के हैंडओवर किया जाता है। अब तक चावल की करीब 550 लाट का उतार एफसीआई गोदाम पर हो चुका है। अभी 3500 लाटें उतार के इंतजार में हैं। ऐसे में करीब एक लाख टन चावल का उतार होना बाकी है। बीते कुछ दिनों से राइस मिल से भेजे जा रहे चावलों को मानकहीन बताकर रिजेक्ट किया गया। दो दिन से इसे लेकर राइस मिलर और एफसीआई के अफसर और कर्मचारियों केे बीच खींचतान बढ़ गई है। एक दिन पूर्व आरएमओ राममूर्तिलाल वर्मा पहुंचे थे, मगर निस्तारण नहीं हो सका।
एफसीआई वाले चावल मानकहीन बता रहे हैं, जबकि राइस मिलर का कहना है कि बेवजह परेशान किया जा रहा। सुविधा शुल्क न देने पर ऐसा किया जा रहा। अब इस मामले में तल्खी बढ़ गई है। राइस मिलर का कहना है कि जब तक लंबित लाटों का उतार कर निस्तारण नहीं होता, वह नया माल आगे नहीं बढ़ाएंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में खरीद पर भी असर पड़ना तय है।
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धान खरीद और किसानों के
भुगतान पर भी पड़ेगा असर
चावल के उतार को लेकर शुरू हुई दिक्कत अगर जल्द दूर न हुई तो इसका असर आने वाले दिनों मेें धान खरीद पर भी पड़ेगा। क्रय केंद्रों पर धान का उठान पहले ही धीमी गति से हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो आगे उठान नहीं होगा। राइस मिलर भी पुरानी लाटों के निस्तारण के बाद ही नई लाटें भेजने की बात कह रहे हैं। चावल उतार के बाद एफसीआई से भुगतान होने के बाद किसान को उसकी फसल का दाम मिलता है। ऐसे में किसानों के धान के पेमेंट में भी देरी हो सकती है। अफसर भी इसी को लेकर चिंतित हो गए हैं।
सुविधा शुल्क न देने पर जान बूझकर चावल रिजेक्ट किया जा रहा है। राइस मिलर को बेवजह परेशान करने वाली बात है। राइस मिलर हड़ताल पर नहीं हैं। सिर्फ लंबित लाटों के निस्तारण होनेे तक नई लाट एफसीआई नहीं भेजी जाएगी। हमारी मांगें उचित हैं। - पंकज अग्रवाल, अध्यक्ष राइस मिल एसोसिएशन
चावल को मानक के तहत न होने की बात कहकर एफसीआई में रिजेक्ट किया गया है। इसे लेकर दोनों पक्षों में बातचीत भी हुई है। इसका असर धान खरीद पर न पड़े, इसलिए समाधान को अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। अब तक हुई खरीद में करीब साढ़े पांच सौ लाट चावल का उतार हो चुका है। साढ़े तीन हजार का बाकी है।
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- डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ
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