पेंशनरों को अब जिंदा होने की सबूत देने के लिए ट्रेजरी अथवा बैंक जाने की जरूरत नहीं होगी। प्रदेश में डिजीटल लाइफ सर्टिफिकेट सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके तहत पेंशनर किसी भी शहर कस्बे से कंप्यूटर से अटैच थम्म स्केनर पर अंगूठा लगाकर ट्रेजरी/बैंक को जिंदा होने का सबूत दे सकते हैं। पांच दिसंबर को मुख्यमंत्री लखनऊ से इसका शुभारंभ करेंगे।
60 वर्ष की आयु तक विभिन्न कार्यालयों में सेवा के बाद सरकार से कर्मचारियों को पेंशन दी जाती है, लेकिन इस पेंशन को पाने के लिए साल में एक बार संबंधित कचहरी अथवा बैंक पहुंचकर जिंदा होने का सर्टिफिकेट देना पड़ता है। इस व्यवस्था में बुजुर्गों खास तौर से बीमार पेंशनरों को काफी दिक्कत होती है, लेकिन जीवन यापन के लिए मिलने वाली धनराशि लेने को मजबूरी में किसी तरह ट्रेजरी तक पहुंचना पड़ता है। शासन ने अब इस व्यवस्था में बदलाव कर पेंशनरों को बढ़ी राहत दी है। पांच दिसंबर के बाद से पेंशनरों को जिंदा होने का सबूत देने के लिए बैंक अथवा ट्रेजरी जाने की जरूरत नहीं होगी। वह जिस शहर अथवा कस्बे में रह रहे हैं वहीं से किसी साइबर कैफे, बैंक अथवा कंप्यूटर सेंटर से थम्म स्केनर पर अंगूठा लगाकर ट्रेजरी की साइट पर भेज सकते हैं। इसमें अंगूठे के साथ साथ आंखों की स्केनिंग भी काम आ सकती है। इसके लिए पीलीभीत सहित प्रदेश की सभी जनपदों में डाटा तैयार किया जा रहा है। पांच दिसंबर से मुख्यमंत्री लखनऊ से इस योजना का शुभारंभ करेंगे। इसके लिए 30 नवंबर और पहली दिसंबर को लखनऊ में प्रदेश के सभी मुख्य कोषाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।