दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए विश्व की लांगेस्ट पदयात्रा पर निकले पांच पदयात्री शुक्रवार को जिले में पहुंचे। यहां उन्होंने एडीएम से मुलाकात की और अभियान के बारे में बताया। पदयात्रियों ने स्कूल कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया।
युवा जागृति इंटरनेशनल जनजागरण अंतर्वेद सेवा संस्थान के तहत चेयरमैन अवध बिहारी ने बताया कि करीब तीन दशक पूर्व लखीमपुर क्षेत्र को दैवीय आपदा का सामान करना पड़ा था। इसमें कई गांव तबाह हो गए। उन्होंने भी बमुश्किल अपनी जान बचाई। इसके बाद मात्र 13 साल की उम्र में वर्ष 1980 में लखीमपुर से अकेले पदयात्रा शुरू की।
पर्यावरण के प्रति अलख जगाने के लिए शुरू हुई इस पदयात्रा से प्रेरित होकर कई लोग उनके साथ जुड़ते गए। लगभग 34 सालों के इस सफर में उन्होंने देश के अलावा बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान, नेपाल, तिब्बत, थाईलैंड और चीन जाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उनकी इस यात्रा को पांच बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में और वर्ष 2014 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया जा चुका है।
इधर शुक्रवार को पदयात्रियों का जत्था बरेली होते हुए पीलीभीत पहुंचा। यहां पदयात्री अवध बिहारीलाल, जितेंद्र प्रताप, महेंद्र प्रताप व गोविंद नंदन ने एडीएम आलोक कुमार सिंह से मुलाकात कर अभियान की जानकारी दी। एडीएम ने स्वास्थ्य विभाग की टीम बुलाकर चारों पदयात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इसके बाद पदयात्रियों ने स्कूल कॉलेज में जाकर विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया।
वे डीआईओएस रामपाल सिंह से भी मिले। डीआईओएस ने उनके इस कार्य की प्रशंसा की। अवध बिहारी ने बताया कि वह अब तक करीब 288 लाख किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं। उनका लक्ष्य तीन लाख किलोमीटर यात्रा करना है। इसके बाद रथयात्रा के माध्यम जनजागरण अभियान चलाया गया। पदयात्रा के दौरान उन्होंने पौधरोपण भी किया।