पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय के चर्चित घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। आरोपी इल्हाम शम्सी ने अपने करीबियों, खासकर महिलाओं के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। यह महिलाएं कौन हैं, अफसर चुप्पी साधे हैं। खातों पर रोक तो लगाई गई, लेकिन जांच टीम अब तक इन खातेदारों तक नहीं पहुंची है। हालांकि इन महिलाओं में तीन इल्हाम पत्नियां बताई जा रहीं हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में सामने आए करोड़ों रुपये के घोटाले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए तथ्य उजागर हो रहे हैं। मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी ने कथित रूप से अपने कई करीबियों के बैंक खातों में सरकारी धनराशि ट्रांसफर की, इनमें महिलाओं के खाते प्रमुख रूप से शामिल हैं। करीब 35 संदिग्ध खातों की पहचान की गई है, इनमें लाखों में सरकारी धन का लेनदेन पाया गया है। इनमें कई खाते महिलाओं के हैं, जिन्हें आरोपी का करीबी बताया जा रहा है।
चर्चा है कि इनमें उसकी तीन पत्नियों और कुछ रिश्तेदारों के खाते भी शामिल हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। घोटाले का खुलासा होने के बाद बीते माह कोतवाली में डीआईओएस की ओर से इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ने पर तीन दिन पूर्व वरिष्ठ सहायक विमल कुमार को भी निलंबित कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित खातों में संदिग्ध तरीके से करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। अर्शी और खुर्जा नाम की महिलाओं के खातों में भी बड़ी धनराशि भेजे जाने की बात सामने आई है। फिलहाल प्रशासन ने सभी 35 खातों पर रोक लगाकर उनकी गहन जांच शुरू कर दी है।
इस पूरे प्रकरण में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि डीआईओएस कार्यालय के बाबुओं से लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी, कोषागार के वेतन बिल बाबू और कोषाधिकारी तक की भूमिका संदिग्ध रही, जिन्होंने बिना पर्याप्त जांच के बड़ी धनराशि को इन खातों में ट्रांसफर होने दिया। मामले की जांच अब शासन स्तर पर चल रही है। और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
सिर्फ दावा करती रही पुलिस, आरोपी को अग्रिम जमानत
डीआईओएस कार्यालय के करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपी की तलाश में पुलिस की चार टीमें खाक छानती रहीं, वहीं आरोपी इलहाम शम्सी के हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले आने की चर्चा है। बताते हैं कि एक महीने से अधिक समय से कोतवाली पुलिस उसके ठिकानों पर छापेमारी का दावा करती आ रही थी। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने भी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एसपी से कहा, लेकिन आरोपी हत्थे नहीं चढ़ा। दूसरे राज्यों से आरोपी को गिरफ्तार कर वाहवाही लूटने वाली कोतवाली पुलिस का इलहाम तक न पहुंचना कई साल खड़े कर रहा है।