पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) ने कछुआ संरक्षण को लेकर एक बार फिर कवायद शुरू की है। टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन ने टर्टल सरवायवल एलायंस (टीएसए) के डायरेक्टर डॉ. शैलेंद्र सिंह से वार्ता की है। संभवत: जल्द ही टीएसए की टीम कछुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनका संरक्षण करने का प्रशिक्षण देगी।
पीटीआर बाघ और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के दिशा में काम कर रहा है। कछुओं की संख्या काफी अच्छी है। पीटीआर प्रशासन के मुताबिक जनपद में कछुओं की नौ प्रजातियां पाई जाती है, मगर इनके संरक्षण को लेकर पूर्व में शुरू की मुहिम ठंडे बस्ते की भेंट चढ़ गई। इन दिनों ब्रीडिंग के चलते कछुए तो खूब दिख रहे हैं, मगर इनकी सुरक्षा को लेकर कोई प्रबंध नहीं है। ये कभी शिकारियों तो कभी कुत्तों का निवाला बन रहे हैं।
गोमती के उद्गम स्थल के आसपास दुर्लभ चंदन प्रजाति के कछुए
पीटीआर के मुताबिक जनपद में कछुओं की नौ प्रजातियां पाई जाती है। इसमें कुछ दुर्लभ प्रजातियां हैं। वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी ने अपने सर्वे के दौरान माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम स्थल में ए ग्रेड शेड्यूल के इंडियन रुफ्ड टर्टल नाम की प्रजाति होने का खुलासा किया था। इसे चंदन कछुए के नाम से भी जाना जाता है। सोसाइटी अध्यक्ष अख्तर मियां के मुताबिक यह प्रजाति केवल भारत में ही पाई जाती है। उनके मुुताबिक चंदन कछुओं को आईयूसीएन की संकटमुक्त सूची में शामिल किया गया है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची एक के तहत इन्हें संरक्षित किया गया। यहां कछुओं की अन्य प्रजातियां भी है, मगर इनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम न होने से उन पर खतरा मंडराता रहता है।
कछुआ संरक्षण को बनाया गया था 50 लाख का प्रस्ताव
कछुआ संरक्षण को लेकर पूर्व में भी प्रयास किए गए। तत्कालीन डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने टीएसए के डायेक्टर डॉ. शैलेंद्र सिंह से बात की थी। गोमती के उद्गम स्थल को कछुआ संरक्षण केंद्र बनाने को लेकर करीब 50 लाख का प्रस्ताव भी बनाया गया, मगर जमीन न मिलने के कारण प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
पीटीआर ने फिर शुरू की कवायद
पीटीआर ने कछुओं की बढ़ती प्रजातियों को लेकर इसके संरक्षण की पुन: कवायद शुरू की है। पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन से टीएसए के डायरेक्टर से वार्ता की। अधिकारियों की माने तो सबसे पहले जहां तहां दिखने वाले कछुओं को रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है। इसको लेकर एफडी ने टीएसए के डॉ. शैलेंद्र सिंह वार्ता की ताकि यहां के लोगों को इस संबंध में प्रशिक्षित किया जाए। अब प्रशिक्षण ऑनलाइन होगा या फिर आमने-सामने बैठाकर कार्यशाला होगी, इस पर मंथन चल रहा है।
जनपद में कछुओं की नौ प्राजतियां पाई जाती हैं, ऐसे में इनके संरक्षण भी बेहद जरूरी हो गया है। टीएसए के डायरेक्टर से प्रशिक्षण को लेकर वार्ता हो चुकी है। - डॉ. एच राजामोहन, फील्ड डायेक्टर