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पीलीभीत जिला अस्पताल का हाल: फटे कंबल... खिड़कियों के टूटे शीशों से आ रही सर्द हवा, ठिठुर रहे मरीज

Mon, 09 Dec 2024 04:33 PM IST
बरेली ब्यूरो जितेंद्र अवस्थी, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत के जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को फटे कंबल दिए जा रहे हैं। कुछ मरीजों को कंबल दिए भी नहीं जाते। मजबूरी में मरीजों को अपने घर से ही कंबल और रजाई लानी पड़ती है।
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फटा कंबल दिखाते मरीज के तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीलीभीत में अगर मरीज को भर्ती कराने जिला अस्पताल ला रहे हैं तो कंबल और रजाई साथ लाइए। यहां मरीजों को फटे कंबल दिए जाते हैं। वार्ड की खिड़कियों के टूटे शीशों से घुसती हवा मरीजों को रात भर परेशान करती है। ब्लोअर और अन्य इंतजाम यहां सिर्फ कागजों पर ही चकाचक हैं। अस्पताल प्रशासन मरीजों को सर्दी से बचाने को लेकर बेपरवाह है। 

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जिला अस्पताल के निचले तल पर मरीजों को पांच वार्डों में भर्ती किया जाता है। मरीजों के बेड पर चादर और ओढ़ने के कंबल अस्पताल प्रशासन की ओर से दिए जाते हैं। मरीजों को सर्दी न लगे इसके विशेष इंतजाम करने के निर्देश भी हैं। मगर जिला अस्पताल के जिम्मेदारों को मरीजों की परवाह नहीं है। 

वार्डों में भर्ती मरीजों को फटे कंबल दिए जा रहे हैं। कुछ मरीजों को कंबल दिए भी नहीं जाते। मजबूरी में मरीजों को अपने घर से ही कंबल और रजाई लानी पड़ती है। रविवार को जिला अस्पताल के वार्डों की पड़ताल में मरीजों ने अस्पताल की ओर से दिए गए फटे कंबल दिखाए और कई आरोप भी लगाए।

 

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मरीज के लिए घर रजाई लेकर आए तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
खेमकरन ने घर से मंगाई रजाई
वार्ड पांच में भर्ती खेमकरन को अस्पताल प्रशासन ने पूरी तरह फटा कंबल थमा दिया। कंबल में इतना बड़ा छेद था कि मरीज का सिर बाहर निकल जाए। मजबूरी में तीमारदार घर से रजाई लाए। तीमारदार सत्यपाल ने अस्पताल से मिला कंबल दिखाते हुए कहा कि इससे जाड़ा तो दूर सही से ओढ़कर बैठा भी नहीं जा सकता।

स्टाफ ने ओढ़ने के लिए कुछ नहीं दिया
वार्ड तीन में भर्ती वीरपाल ने बताया कि वह बृहस्पतिवार को अस्पताल आए थे। उसी दिन स्टॉफ से कंबल मांगा था, लेकिन मिला नहीं। पत्नी गीता ने बताया कि घर से पतला कंबल मंगाकर सर्दी से बचाव कर रहे हैं। अस्पताल वाले ध्यान ही नहीं देते। जगदीश के तीमारदार ने बताया कि अस्पताल से कंबल मिला उससे कुछ भला नहीं होने वाला। घर से ही कंबल लेकर आए हैं। 

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मजबूरी है, घर से ही लाने पड़े गर्म कपड़े
वार्ड एक और दो में भर्ती मरीज भी घर से लाए कंबल और रजाई ओढ़कर सर्दी से बचाव करते दिखे। अकील ने बताया कि उन्हें कंबल मिला ही नहीं। मजबूरी में घर से लाना पड़ा। गणेश ने भी घर से लाया कंबल ओढ़ रखा था। कई अन्य मरीज भी घर की रजाई ओढ़े नजर आए। 

खिड़की के टूटे शीशे बने मुसीबत
इसी वार्ड में खिड़की के समीप वाले बेड पर भर्ती नन्हेलाल के तीमारदार भी घर से कंबल लेकर आए थे। खिड़की का एक शीशा टूटा था। इससे पूरी रात हवा अंदर आती है। तीमारदार ने बताया कि सर्दी से बचने के लिए खिड़की का पर्दा बंद रखते है। वार्ड के अन्य मरीज भी घर से कंबल या रजाई लेकर पहुंचे थे। कुछ तीमारदारों ने बताया कि चादर जैसे हल्के कंबल से कुछ भला भी नहीं होता। 

जिला अस्पताल को 300 नए कंबल दिए गए हैं। इस बारे में सीएमएस से भी जानकारी की गई है। अगर मरीजों को फटे कंबल दिए जा रहे हैं तो इसकी जांच कराएंगे। खिड़कियों के शीशे भी सही कराए जाएंगे।- डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज

जिला अस्पताल में मरीजों को फटे कंबल दिए जाने के मामले में संबंधित को निर्देश जारी किए जाएंगे। मामले की जांच भी कराएंगे।- संजय कुमार सिंह, डीएम

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