पीलीभीत। किसान पर हमला करने वाली बाघिन को पकड़ने के लिए रविवार रात रिछोला क्षेत्र में पिंजरा लगाया गया। अंदर बकरी बांधकर पिंजरे को रात भर गुरुद्वारे के पास रखा गया, मगर वह उसमें नहीं गई। भोर में साढ़े तीन बजे एक बार बाघिन पिंजरे के पास आई जरूर, मगर वह पिंजरे के ऊपर ही चढ़ गई, जिससे वजन पड़ते ही पिंजरे का दरवाजा बंद हो गया। दरवाजा बंद होने की आवाज से बाघिन भाग निकली। यह देखकर हक्का-बक्का वनकर्मी इधर-उधर हो गए। सोमवार को टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी प्रभाग के वनकर्मी बाघिन की निगरानी में डटे रहे।
टाइगर रिजर्व की माला रेंज के रिछोला क्षेत्र में पिछले करीब 20 दिनों से एक बाघिन आबादी क्षेत्र में दस्तक दे रही है। बाघिन के बार-बार जंगल से बाहर निकलने को लेकर कानपुर से पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह को बुलाया गया। उन्होंने चार दिन तक पड़ताल करने के बाद वासस्थल के आसपास पानी की व्यवस्था न होने के चलते बाघिन के बाहर आने की बात कही। इस पर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वासस्थल के पास गड्ढे खुदवाकर पानी की व्यवस्था करा दी थी। इसके बाद छह दिन तक बाघिन की लोकेशन जंगल में पाई गई। मगर, रविवार शाम तीन बजे बाघिन ने रिछोला में घर में घुसकर एक किसान पर हमला कर दिया। किसान को बचाने आए उसके पड़ोसी बुजुर्ग पर भी बाघिन हमलावर हो गई। बाघिन के हमले की सूचना मिलते ही टाइगर रिजर्व प्रशासन हरकत में आ गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद बाघिन को पकड़ने के लिए रविवार रात 11 बजे रिछोला गांव में गुरुद्वारे के समीप पिंजरा लगाया गया। उसमें एक बकरी भी बांधी गई। बाघिन की निगरानी के लिए 14 वनकर्मी भी डटे रहे। वन कर्मियों के अनुसार रात 3:30 बजे अचानक बाघिन पिंजरे के पास तो पहुंची, मगर वह पिंजरे के भीतर न जाकर उसके ऊपर चढ़ गई। इससे पिंजरे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया। दरवाजा बंद होने की आवाज सुनते ही बाघिन भाग निकली। यह नजारा देख वनकर्मियों के होश फाख्ता हो गए।
सोमवार सुबह दो रेंजों के वनकर्मी और सामाजिक वानिकी की टीम भी रिछोला क्षेत्र में पहुंची। एसडीओ माला उमेश कुमार राय भी मौके पर पहुंचे। पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग पर सुबह बाघिन फिर से देखी गई। फिलहाल अधिकारियों के मुताबिक बाघिन की लोकेशन जंगल के अंदर ही पाई जा रही है। वन विभाग अब बाघिन को पकड़ने की योजना बना रहा है। अब एक और पिंजरा लगाने पर मंथन चल रहा है।
ग्रामीण आक्रोशित, मौके पर पहुंची पुलिस
रिछोला में बाघिन द्वारा दिनदहाड़े घर में घुसकर दो लोगों को घायल करने की घटना के बाद क्षेत्र में दहशत है। बाघिन के हमलावर होने के बाद भी वन विभाग द्वारा उसे पकड़ने की ठोस कार्रवाई नहीं की। सोमवार अपराह्न क्षेत्रवासी पीलीभीत-माधोटांडा रोड पर एकत्र होकर बाघिन पकड़ने की मांग करने लगे। बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र होने की जानकारी पर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। सूचना मिलते ही कई थानों की फोर्स भी मौके पर पहुंच गई। सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार ने ग्रामीणों वार्ता कर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर आक्रोशित लोग शांत हुए।
दुधवा और कानपुर के विशेषज्ञों की टीम भी पहुंची
आबादी क्षेत्र में बार-बार आ रही रही बाघिन के स्वभाव की पड़ताल करने के लिए सोमवार को कानपुर के पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह और दुधवा टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों की टीम भी पहुंच चुकी है। टीम ने रिछोला में पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की। इसके बाद टीम ने अधिकारियों से मंत्रणा भी की। सूत्रों के मुताबिक बाहर से आई टीम टीम बाघिन के क्रियाकलापों पर नजर रखकर उसको पकड़ने की रणनीति तय करेगी। जरूरी होने पर बाघिन को बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) कर पकड़ा भी जा सकता है।
कानपुर और दुधवा से छह सदस्यों की टीम यहां पर आई है। फिलहाल तो बाघिन को ट्रैंक्युलाइज करने की योजना नहीं है। पिंजरा लगाकर पकड़ने की कार्रवाई की जा रही है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व