हरदोई ब्रांच नहर में बुधवार को मृत मिली बाघिन काफी दिनों से बीमारी थी और कुछ पी नहीं पा रही थी। इसका खुलासा आईवीआरआई बरेली में कराए गए पोस्टमार्टम से हुआ है। उसके शरीर में किसी भी प्रकार की चोट अथवा घाव आदि के निशान नहीं मिले हैं। टाइगर रिजर्व जंगल से गुजरने वाली हरदोई ब्रांच नहर में बुधवार को शाहजहांपुर की खुटार रेंज में पड़ने वाले नवदिया बंकी गांव के निकट दोपहर को एक बाघिन का शव नहर में नहा रहे पशु चराने वाले बच्चों ने देखा था। इसकी सूचना पर वनसंरक्षक सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। शव को पानी से निकलने के बाद पीलीभीत लाया गया। रात भर टाइगर रिजर्व मुख्यालय में डीप फ्रीजर में रखने के बाद बृहस्पतिवार सुबह उसे पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया। चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। इसमें उसके शरीर में कहीं भी किसी भी प्रकार की बाहरी अथवा अंदरूनी चोट नहीं पाई है। बीमारी के चलते बाघिन कमजोर हो गई थी और शिकार न कर पाने के चलते भूखी भी थी। उसका पेट खाली मिला है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पानी पीते समय कमजोरी के चलते बाघिन नहर में गिर गई हो, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में उसकी मौत भी 36 से 48 घंटे पहले होना बताया गया है, लेकिन मौत का सही और स्पष्ट कारण जानने को चिकित्सक इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अध्ययन कर रहे हैं।
फैक्ट फाइल
उम्र 12 वर्ष लगभग
लंबाई 255 सेंटीमीटर
ऊंचाई 102 सेंटीमीटर
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ फोटो मिलान कर करेगा पहचान
हरदोई ब्रांच नहर में मिली बाघिन किस रेंज की है इसकी पहचान डब्ल्यडब्ल्यूूएफ द्वारा कैमरा ट्रैप के दौरान प्राप्त हुए फोटोग्राफ से की जा रही है। इसके लिए वनसंरक्षक ने तीन दिन का समय दिया है। इसके लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। नहर में मृत मिली बाघिन की मौत का कारण जानने के साथ वन विभाग को उसकी पहचान करना भी बड़ी समस्या है। बाघिन किस रेंज की है और नहर में कैसे पहुंची, अब इस पर मंथन शुरू हो गया है। पिछले दिनों टाइगर रिजर्व की सभी रेंजों में कैमरा ट्रेप से हुई गणना के समय कैद हुए फोटोग्राफ से बाघिन के फोटो का मिलान कर पहचान कराई जाएगी। यदि इसमें मिलान नहीं हो पाता है तो उत्तराखंड की सुरई रेंज अथवा खुटार, मैलानी रेंज के फोटोग्राफ से मिलान कराया जाएगा। इस कार्य के लिए वनसंरक्षक ने वीके सिंह ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को तीन दिन का समय दिया है।
उत्तराखंड से बहकर आना मुश्किल
नहर में मिली बाघिन के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा उत्तराखंड के सुरई रेंज की भी होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है वनबसा के निकट लोहियाहेड से निकलने वाली मुख्य शारदा नहर में बहकर बाइफरकेशन पहुंची जहां से हरदोई ब्रांच नहर से बहती हुई शाहजहांपुर की सीमा में प्रवेश कर गई। लेकिन सिंचाई विभाग से जुड़े जानकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते। जानकारों का कहना है मुख्य शारदा से बाइफरकेशन होते हुए घटना स्थल तक लगभग 50 किलोमीटर से अधिक की दूरी है। इस बीच दोनों नहरों में दो दर्जन से अधिक झाले हैं। इन झालों में अक्सर पशुओं के शव फंसे देखे जाते हैं जो कई कई दिनों तक फंसे रहते हैं। फिर भला मौत के कुछ घटों बाद बाघिन का शव इतनी झाले पार करता हुआ कैसे पहुंच सकता है।
दियोरिया अथवा खुटार के होने की संभावना
बाघिन के शव की स्थिति को देख इसका किसी आसपास क्षेत्र की ही होने की संभावनाएं ज्यादा नजर आ रही है। क्योंकि पानी में इतनी दूर बहकर शव यहां तक नहीं पहुंचता, साथ ही बीमार और भूखी बाघिन भी ज्यादा लंबा सफर तय करके यहां तक पहुंचेगी ऐसा भी मुश्किल है।