टाइगर रिजर्व जंगल से सटे क्षेत्रों में निजी वनों को विभाग अधिग्रहित करेगा। इसमें भूमि स्वामी को जमीन के साथ पेड़ों की कीमत भी दी जाएगी। एनटीसीए के आईजी के निर्देश पर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में लगभग 72 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में टाइगर रिजर्व का जंगल है। वन विभाग के इन जंगलों के साथ इससे सटे कई जमीन ऐसी हैं जिस पर साल, सागौन आदि के पेड़ खड़े हैं। ये निजी वन का रूप ले चुके हैं। ऐसे निजी वनों पर खेती भी नहीं हो पा रही है और टाइगर रिजर्व बन जाने के कारण इन खड़े पेड़ों को काटने की इजाजत भी नहीं मिलेगी। ऐसे में कुछ निजी वन स्वामियों ने कुछ माह पहले डीएफओ से मिलकर अपनी जमीन जंगल के नाम देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले दिनों जिले के दौरान पर आए एनटीसीए के आईजी एचएस नेगी ने जंगल भ्रमण के दौरान टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में निजी वनों को देख इसे जंगल में शामिल कराने के निर्देश दिए। उन्होंने डीएफओ को ऐसे लोग जो स्वेच्छा से अपने निजी वनों को टाइगर रिजर्व को देना चाहते हैं, प्रस्ताव लेने के निर्देश दिए। आईजी के निर्देश पर डीएफओ ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके लिए संबंधित रेंज के माध्यम से प्रस्ताव मांगेे गए हैं।
जमीन के साथ मिलेगा पेड़ों का दाम
जंगल किनारे के निजी वन क्षेत्रों का टाइगर रिजर्व में अधिग्रहण होने पर जमीन की कीमत के साथ पेड़ों का आंकलन कर उसका भी मूल्य दिया जाएगा।
25 हेक्टेअर में हैं निजी वन
टाइगर रिजर्व की विभिन्न रेंजों में जंगल से सटे लगभग 25 हेक्टेअर क्षेत्रफल में निजी वन हैं। इसमें गजरौला, पुरैनी दीपनगर, बैल्हा सहित कई निजी वन शामिल हैं।
टाइगर रिजर्व के जंगल से सटे क्षेत्र के निजी वनों को किसानों की इच्छा से अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए रेंजर के माध्यम से प्रस्ताव लिए जाएंगे। प्रस्ताव की जांच और आंकलन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ