जनपद के जंगलों को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद इसको देखने को शासन स्तर पर उत्सुकता बढ़ी है। टाइगर रिजर्व में आए दिन जनप्रतिनिधि व प्रदेश के आला अफसर पहुंच रहे हैं। उनके साथ वाहनों का बड़ा काफिला भी होता है, लेकिन वासस्थलों के आसपास फर्राटा भरते वाहनों के काफिले वाइल्ड लाइफ को प्रभावित कर रहे हैं।
टाइगर रिजर्व देखने को शासन स्तर पर बढ़ी उत्सुकता
अब टाइगर रिजर्व बना तो मंत्रियों और आला अफसरों को यहां के जंगल देखने की जरुरत महसूस हुई। जंगलों में जहां सख्ती की बात कही गई, वहां इन दिनों फर्राटे भरते वाहन दौड़ रहे हैं। वन राज्यमंत्री फरीद महमूद किदवई से लेकर प्रभारी मंत्री बलराम सिंह दौरे कर चुके हैं। शासन स्तर के बड़े आला अफसर भी यहां आ चुके हैं।
बड़ा काफिला वन्यजीवों के लिए बना बाधक
बात वन अफसरों, राजनेताओं के आने की नहीं, बल्कि जंगल में एक साथ 15-15 वाहनों के काफिले घूमने की है। जिसके चलते वाइल्ड लाइफ प्रभावित हो रहा है। विभागीय अफसर इस मामले में दबी जुबान से कह तो रहे हैं, लेकिन अपनी आवाज बुलंद करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
एक साथ दो वाहन ही घूमना उचित
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक दो वाहन ही साथ में होने चाहिए। एक वन विभाग का और दूसरा मेहमानों का। बाघ के खतरे के चलते शाम होते ही गेस्ट हाउसों के किनारे आ जाते हैं, लेकिन वाहनों के काफिले उनके विचरण में खास खलल डाल रहे हैं।
टाइगर रिजर्व में नियमानुसार ही वाहनों की आवाजाही रहती है। इसको लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है। हाल में आए जनप्रतिनिधियों व अफसरों के वाहनों को भी अलग अलग टोलियों में निकाला गया था।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व