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देखते रहे गए वनकर्मी.. शाहजहांपुर की सीमा में पहुंच गया बाघिन का शव

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पीलीभीत। पूरनपुर के घुंघचाई चौकी क्षेत्र के मटेहना गांव की सीमा में शनिवार सुबह नहर में उतराते दिखे बाघिन के शव को लेकर भले ही टाइगर रिजर्व के अफसर तेज बहाव की बात कहकर बचाव कर रहे हों, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक शव काफी देर तक नहर में किनारे पर रहा लेकिन वनकर्मी उसे निकालने की मात्र औपचारिकता ही निभाते रहे। काफी देर तक जनपद सीमा में रहने के बाद शव बहकर शाहजहांपुर की सीमा में पहुंच गया।
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मटहेना गांव की सीमा में बकरी चराने नहर की पटरी पर पहुंचे बच्चों की सूचना पर काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए थे। दियोरिया रेंज के वन दरोगा दिनेश गिरी व दो वन वॉचर भी मौके पर पहुंच गए। शव बाहर निकालने के बाद वनकर्मियों ने रस्सी मंगवाई और औपचारिकता निभानी शुरू कर दी। बाघिन का शव काफी देर तक उतराता रहा। सफल प्रयास न करने पर शव नदी के तेज बहाव के साथ आगे की ओर निकल गया। इसके बाद दियोरिया रेंज की सीमा से करीब तीन किमी अंदर शाहजहांपुर बॉर्डर क्षेत्र के नवीनगर गांव की सीमा में नहर किनारे जाकर लग गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे दोनों सीमाओं के वन अफसरों ने शव को कब्जे में ले लिया। इधर बाघिन के शव को लेकर वन विभाग की इस कार्यप्रणाली से यह साफ है कि उन्होंने गर्दन बचाने के लिए बाघिन का शव बाहर निकालने की जहमत भी नहीं समझी। मात्र औपचारिकता ही निभाई जाती रही। वहीं अफसर भी पानी के तेज बहाव का हवाला देकर पक्ष मजबूत करते दिखे।
दर्जनों झाल को पार कर शाहजहांपुर सीमा में कैसे पहुंच गया बाघिन का शव
पीलीभीत। अफसर भले ही वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने का दावा कर रहे हों, इसके लिए जीपीएस समेत कई सिस्टम के माध्यम से गश्त करने की बात भी कही जा रही हो, लेकिन दियोरिया रेंज से सटे शाहजहांपुर बॉर्डर सीमा तक बाघिन का शव पहुंचने से व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है।
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जनपद सीमा में प्रवेश तक शारदा मुख्य नहर में कई झाल पड़ते हैं। इसके बाद हरदोई ब्रांच नहर में दियोरिया रेंज की सीमा तक दर्जनों झाल हैं। ऐसे में बाघिन का शव इन झालों को पार कर दियोरिया रेंज की सीमा तक कैसे पहुंचा? यह जांच का विषय है।
टाइगर रिजर्व के जंगलों के बीचों बीच नहरों का जाल बिछा हुआ है। उत्तराखंड की ओर से शारदा मुख्य नहर जनपद सीमा में आती है। उत्तराखंड से बाइफकेशन तक शारदा मुख्य नहर में कई फाल पड़ते हैं। बाइफरकेशन स्थिति सिंचाई परियोजना का मुख्यालय है। यहां से लखीमपुर खीरी, हरदोई ब्रांच व फीडर नहर निकलती है। नहर के प्रत्येक दो-तीन किमी पर झाल बनी हुई है। अगर कोई वन्यजीव नहर में गिर जाता है तो बहकर झाल में फंस जाता है। यदाकदा निकल भी जाए तो दूसरी झाल में फंसकर पानी में ही घूमता रहता है। ऐसे कई मामले पूर्व में सामने भी आ चुके है। इधर, बाइफरकेशन से निकलने वाली हरदोई ब्रांच नहर में दियोरिया रेंज की सीमा तक दर्जनों झाल पड़तीं हैं। ऐसे में बाघिन का शव वहां तक कैसे पहुंचा और गश्त की जिम्मेदारी संभाल रहे वनकर्मियों को भी इसकी भनक नहीं लग सकी यह चर्चा का विषय रहा।

इस साल हुई दो बाघिन की मौत
टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के इंतजामों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अफसर भले ही लगातार रणनीति बनाकर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास करने की बात कह रहे हों, लेकिन सुरक्षा में अक्सर चूक सामने आ रही हैं। यही वजह है कि इस साल 25 जुलाई को मटहेना गांव में मानव वन्यजीव संघर्ष में बाघिन की मौत हुई वहीं शनिवार को एक और बाघिन का शव टाइगर रिजर्व की सीमा से बहकर शाहजहांपुर बॉर्डर क्षेत्र में बरामद हुआ है।
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