संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। हजारा क्षेत्र के गांव कबीरगंंज के किसान को मार डालने वाले बाघ की शनिवार को भी लोकेशन न मिलने से उसे ट्रैंक्युलाइज कर नहीं किया जा सका। बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की समय सीमा निकलने पर अभियान थम गया। हालांकि बाघ की निगरानी को टीमें जुटी रहेगी।
हजारा क्षेत्र मेंं जंगल के बाहर चहल कदमी करने वाले बाघ ने 28 अगस्त को गांव शांतीनगर के मुंशी प्रसाद पर उस समय हमला कर मार डाला था, जब वह केले का खेत देखने गए थे। इसके बाद कई दिन तक बाघ की चहल कदमी होती रही। बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर पकडऩे की अनुमति पखवाड़ा भर पहले मिली। 19 सितंबर से बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने को अभियान शुरू किया गया। गांव कबीरगंज में गन्ना के खेत के समीप मचान बनाया गया। खीरी उत्तरी से आए विशेषज्ञ डॉ. दया और डॉ. तल्हा उसको ट्रैंक्युलाइज करने की कोशिश में जुटे रहे। हाथी भी मंगवाए गए, ताकि हाथियों पर सवार होकर विशेषज्ञ बाघ को ढूंढ सकें, लेकिन बाघ नहीं मिला। ट्रैंक्युलाइज कर बाघ को पकड़ने की समय सीमा शनिवार शाम को सूर्य अस्त होने के साथ समाप्त हो गई। संपूर्णानगर रेंजर ललित कुमार ने बताया कि बाघ की काफी तलाश कराई गई, मगर नहीं मिला। अब अभियान को रोक दिया गया है। बाघ की मॉनिटरिंग को टीमें लगी हुई हैं।