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बाघों के वासस्थलों पर संकट

Sat, 04 Mar 2017 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा।
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शारदा डैम से बिना परमिट निकाला जा रहा है नरकुल
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हालात न सुधरे तो मैदानी इलाकों की ओर भागेंगे बाघ
 जंगल में बाघ का वासस्थल कहे जाने वाले नरकुल पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। टाइगर रिजर्व से सटे शारदा डैम में खड़े नरकुल का तेजी से सफाया हो रहा है। वन विभाग द्वारा कोई परमिट या निकासी अनुमति न देने के बावजूद ट्रैक्टर ट्रालियों से नरकुल बाहर भेजा जा रहा है।
जनपद के जंगलों को टाइगर रिजर्व बनने के बाद नरकुल की नीलामी पर प्रतिबंध लग गया हैं। नरकुल बाघ का वास स्थल कहलाता है। बताया जा रहा है कि टाइगर रिजर्व से सटे शारदा डैम के इलाके में खड़े नरकुल को सांठगांठ के चलते सिंचाई विभाग से कौड़ियों में नीलाम करा लिया गया। चूंकि नरकुल वन उपज में शामिल हैं और टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में खड़ा हैं इसलिए इसको काटने व निकासी से पूर्व टाइगर रिजर्व से कटान व निकासी आदेश लेना चाहिए, लेकिन यहां वन कर्मियों की सांठगांठ से डैम में खड़ा नरकुल काटकर ट्रैक्टर ट्रालियों के जरिए बाहर भेजा रहा है। इसकी आड़ में टाइगर रिजर्व के नेपाल सीमा से सटे इलाके की झीलों व तालाबों के किनारे खड़ा नरकुल अवैध रूप से निकाला जा रहा हैं। डैम में खड़े नरकुल को एक बार नीलाम किया लेकिन यह पूरे वर्ष काटा जा रहा है। वहीं इस नरकुल को टाइगर रिजर्व के रास्ते ले देकर निकलवाया जा रहा है। इस नरकुल से कालोनियों में चटाई बनाने का कार्य किया जा रहा है और बनाई जा रही चटाइयों को टाइगर रिजर्व से बिना अनुमति रवन्ना लिए ट्रकों में भरकर महानगरों में सप्लाई किया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि इसी तरह बाघों के वासस्थलों को नष्ट किया गया तो आने वाले समय में बाघों के जंगल से निकलकर मैदानी इलाकों में पहुंचने की घटनाओं में खासा इजाफा हो सकता है। इधर इस मामले में बराही रेंज के वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि नरकुल का सिंचाई विभाग ने पूर्व में नीलाम किया था। निकासी के लिए नियमानुसार रवन्ना परमिट होना चाहिए। यदि गलत तरीके से नरकुल निकाला जा रहा है तो तत्काल रोक लगाई जाएगी।
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पूरनपुर और अमरिया में बाघ दिखने से दहशत
 जिले के जंगल के बाहर बाघों की चहलकदमी कम नहीं हो रही है। शनिवार को पूरनपुर के अर्जुनपुर क्षेत्र में बाघ रास्ते पर आकर बैठ गया। वहीं अमरिय में एक खेत में बाघ पहुंचने पर मजदूर डर कर पास के पेड़ पर चढ़ गए। 
पूरनपुर। बराही जंगल से सटे गांव अर्जुनपुर, कीरतपुर, भीमपुर आदि में कई दिन से बाघ की चहल कदमी देखी जा रही है। बाघ को खदेड़ने के लिए एक टीम गठित की गई है। टीम में शामिल कर्मचारी हाथियों पर घूमकर बाघ को जंगल की ओर खदेड़ने को पिछले चार-पांच दिनों से कांबिंग कर रहे है। शनिवार को बाघ अर्जुनपुर के निकट बीच रास्ते पर आकर बैठ गया। इसकी जानकारी होने पर गुरुद्वारे से इसकी सूचना देकर सभी को सर्तक किया गया। सूचना मिलने पर डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल के नेतृत्व में वनविभाग टीम मौके पर पहुंची और बाघ की तलाश की। इस दौरान बाघ तो नहीं मिला। यहां के बाद टीम भीकमपुर की ओर कांबिंग को रवाना हो गई। 
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अमरिया। क्षेत्र के गजरौला निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख के खेत पर सुबह मजदूर गन्ना छीलने जा रहे थे। अचानक बाघ गन्ने से बाहर निकल आया जबकि दूसरी ओर उसके शावक मौजूद थे। बाघ और उनके शावकों को देख मजदूर घबरा गए। फार्म हाउस दूर होने के कारण घबराए मजदूरों ने खेत में खड़े पापुलर के पेड़ों पर चढ़कर शोर मचाना शुरू किया। सूचना मिलने पर सामाजिक वानिकी के डीएफओ आदर्श कुमार टीम के साथ गजरौला पहुंचे और खेत का निरीक्षण किया। डीएफओ ने बताया कि अमरिया क्षेत्र में पिछले कई सालों से एक बाघ परिवार के साथ जंगल के बाहर रह रहा है लेकिन अब तक किसी पर हमले की सूचना नहीं है। ग्रामीणों से सावधान रहने की अपील की गई है। 

 
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