पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बाघ मित्रों के अनुभव को करीब से जानने और उनसे नई चीजें सीखने के लिए बिजनौर से 20 सदस्यीय बाघ मित्रों का दल मंगलवार को पीलीभीत पहुंचा। दो दिवसीय दौरे के दौरान ये लोग जंगल और उसे सटे संवेदनशील इलाकों में भ्रमण कर वन्यजीवों की गतिविधियां और बाघ मित्रों के कार्य करने के तरीकों के बारे में जानेंगे।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के करीब 70 से अधिक गांव मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर संवेदनशील माने जाते हैं। इन गांवों में बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी आए दिन देखी जाती है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की दिशा में पीटीआर के बाघ मित्र लगातार जिम्मेदारी निभा रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से गांव के जागरूक ग्रामीणों को बाघ मित्र बनाकर वन्यजीवों की निगरानी के साथ ग्रामीणों को जागरूक करने पर अहम जोर दिया गया।
इससे स्थिति भी बेहतर हुई। संघर्ष की घटनाएं भी कम हुईं। इसके बाद बाघ मित्रों के कार्यों को लगातार सुर्खियां मिलने लगीं। इधर बिजनौर में भी मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है। तेंदुए का आतंक अधिक है। ऐसे में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बाघ मित्रों के अनुभव को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बिजनौर से 20 सदस्यीय बाघ मित्रों का दल सोमवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व पहुंचा।
यहां दो दिवसीय दौरे के दौरान पीटीआर के बाघ मित्र उन्हें संवेदनशील इलाकों में वन्यजीवों पर नजर रखने के साथ ग्रामीणों को किस तरह से जागरूक किया जाता है, इसके बारे में बताएंगे। मंगलवार को पहले दिन बाघ मित्रों के दल ने महोफ रेंज समेत अन्य इलाकों का भ्रमण किया। इस दौरान डीएफओ मनीष सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार व रेंजर सहेंद्र यादव आदि ने भी जरूरी जानकारियां दीं।