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बाघ की मौत मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज

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पीलीभीत। बेहोश करने के बाद बाघ की मौत का मामला शासन स्तर पर गंभीरता से लिए जाने के बाद सामाजिक वानिकी प्रभाग ने भी इस पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एक अफसर की ओर से बाघ की मौत के मामले में अज्ञात के खिलाफ विभागीय केस दर्ज किया है। बाघ के शरीर पर मिली पुरानी चोटों को इसका आधार बनाया गया है।
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टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर खेतों में पहुंचे बाघ को बेहोश करने के कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई थी। उच्चस्तरीय टीम ने 6 मई को घटनास्थल पर पहुंचकर इसकी बारीकी से जांच की थी। इसके बाद टीम ने गढ़ा रेंज के गेस्टहाउस में अभियान में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम से पूर्व भी टीम के अधिकारियों से घटना के संबंध में कई बिंदुओं पर जानकारी हासिल की थी। टीम में अपर प्रमुख वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर पीके शर्मा, मुख्य वन संरक्षक रमेश पांडेय और कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह शामिल थे। यह उच्चस्तरीय टीम सात मई को जांच के बाद लखनऊ रवाना हो गई थी। टीम के मुताबिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
सांसद मेनका गांधी ने इस मामले में कई सवाल उठाए हैं। वहीं वन्यजीव प्रेमी पहले ही सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना था कि बेहोश करने के लिए ओवरडोज देने से बाघ की मौत हुई थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत पुरानी चोटों से होना बताया गया था। शासन की ओर से गंभीरता दिखाए जाने पर कार्रवाई भी जल्द होना माना जा रहा है। ऐसे में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए सामाजिक वानिकी वन प्रभाग ने अज्ञात के खिलाफ विभागीय केस दर्ज किया है। यह केस सामाजिक वानिकी के गढ़ा बीट प्रभारी बाबूराम की ओर से वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9/ 51 के तहत दर्ज किया गया है। इसकी जांच उप प्रभागीय वन अधिकारी प्रवीण खरे को सौंपी गई है। उन्होंने जांच भी शुरू कर दी है।
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