पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से निकला बाघ पकड़ा गया
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से निकला बाघ पिछले करीब डेढ़ माह से रिहायशी इलाके में घूमकर दहशत फैलाए था। शासन से अनुमति मिलने के बाद शनिवार को वन विभाग की टीम ने बाघ को बेहोश करने के बाद पकड़ लिया। पकड़ने के बाद बाघ को पिंजड़ा में कैद करके गढ़ा रेंज ले जाया गया। बाघ को पकड़ने का अभियान लखनऊ से आए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर कमलेश कुमार की देखरेख में चलाया गया।
पिछले करीब डेढ़ महीने से रिहायशी इलाकों में घूम रहे बाघ बेहोश करके पकड़ने की अनुमति शासन ने दो दिन पूर्व दी थी। इसके बाद शुक्रवार को वन विभाग ने बाघ को बेहोश करके पकड़ने की तैयारी कर ली थी। शनिवार को दिन निकलते ही वन विभाग की टीम ने बाघ की लोकेशन ट्रेस की। टीम को बाघ की लोकेशन कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव ककरौआ के समीप गन्ने के खेत पर मिली।
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वनकर्मियों ने गन्ने के खेत के चारों ओर जाल लगाकर बाघ की घेराबंदी की। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर की देखरेख में शाम करीब चार बजे अभियान शुरू किया गया। टीम में शामिल जिम कार्बेट पार्क के ट्रेंक्युलाइज एक्सपर्ट डॉ. दुष्यंत और पीटीआर के डॉ. दक्ष गंगवार ट्रैक्टर पर सवार होकर गन्ने की फसल के अंदर घुसे। कुछ ही देर में डॉ. दुष्यंत ने ट्रेंक्युलाइज गन से पहली डार्ट में बाघ को बेहोश कर दिया। इसके बाद चिकित्सकों ने बाघ का मेडिकल परीक्षण किया।
वन अफसरों के मुताबिक पकड़ा गया नर बाघ करीब साढ़े तीन साल का है। बाघ को पिंजड़े में बंद करने के बाद वाहन से सुरक्षित गढ़ा रेंज ले जाया गया। अभियान की सफलता पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सभी को बधाई दी। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा, फील्ड डायरेक्टर जावेद अख्तर, डिप्टी डायरेक्टर पीटीआर नवीन खंडेलवाल, डीएफओ सामाजिक वानिकी प्रभाग संजीव कुमार समेत पीटीआर के अन्य अफसर व वनकर्मी मौजूद रहे।