टाइगर रिजर्व में बाघ की गणना का काम पूरा हो गया है। दो चरणों में हुई गणना के बाद अब कैमरों की डाउनलोडिंग की जा रही है। कंप्यूटर में लोड डाटा का वन्यजीव संस्थान देहरादून व एनटीसीए में विशेषज्ञों द्वारा मिलान कर बाघों की संख्या का पता लगाया जाएगा।
पीलीभीत में जंगल में बाघ की संख्या जानने के लिए पिछले वर्षों में भी गणना होती रही है लेकिन नौ जून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद इसमें सभी रेंजों में गणना कराने का निर्णय लिया गया। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने विभागीय टीम के सहयोग से जंगल क्षेत्र की सभी रेंजों में गणना की योजना तैयार की, जिसके तहत गणना का काम दो चरणों में किए जाने पर सहमति बनी थी। इसके बाद अप्रैल के प्रथम सप्ताह में टाइगर रिजर्व की बराही और हरीपुर रेंज के साथ दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर सेंचुरी में कैमरे लगाकर गणना शुरू हुई। इसमें लगभग 250 कैमरों का उपयोग किया। 31 मई को पहला चरण पूरा होने के बाद जून में कैमरों की चिप बदलकर इन्हें शेष बची महोफ, माला और दियोरिया रेंज में लगाया गया। कैमरा ट्रैपिंग के दौरान नियमित पेट्रोलिंग कर इनकी निगरानी की गई साथ समय समय पर चिप को डाउन लोडिंग कर गणना की जांच भी चलती रही। 60-60 दिनों के दो चरणों मे हुई गणना अब पूरी हो गई है। इस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने विभागीय टीम की मदद से कैमरों को जंगल से खोलना शुरू कर दिया है साथ ही इन कैमरों की चिप को कंप्यूटर में लोड किया जा रहा है।
वन्यजीव संस्थान में होगी जांच
कैमरा ट्रैप के माध्यम से हुई गणना में सभी कैमरों की चिप लोड होने के बाद डाटा को देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान भेजा जाएगा। यहां वैज्ञानिकों द्वारा इसमें कैद बाघ के फोटो का मिलान कर गणना की जाएगी।
सितंबर में हो सकती है संख्या की घोषणा
जंगल से कैमरा ट्रैपिंग होने के बाद डाटा लोड करने में जुलाई के अंत तक वन्यजीव संस्थान को भेज दिया जाएगा जहां करीब दो माह में इनकी गणना के बाद परिणाम घोषित हो सकेंगे।
बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद
बाघ की गणना के दौरान सभी रेंजों में बड़ी संख्या में शावक भी देखें गए हैं। इससे उम्मीद की जा रही है इस गणना में बाघों की संख्या 2013 में हुई गणना से अधिक होगी।
बाघ गणना के लिए लगे कैमरों का काम पूरा हो गया है। अभी कैमरों के फोटो का विशेषज्ञों द्वारा मिलान किया जाना है। इसके बाद ही सही स्थिति सामने आ सकेगी। -कैलाश प्रकाश, डीएफओ