पीलीभीत। दहेज हत्या के मामले में पति समेत तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साक्ष्य के अभाव में ननद को दोषमुक्त कर दिया गया। वर्ष 2017 के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अनु सक्सेना ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद सजा सुनाई। दोषियों पर 37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
विवाहिता के पिता विशन कुमार ने गजरौला थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उसकी पुत्री विमला की शादी अप्रैल 2016 में गजरौला क्षेत्र के ढेरम मडरिया निवासी शंकर लाल के पुत्र शिव कुमार के साथ हुई थी। विवाहिता की ननद ने उसके भाई से प्रेम विवाह किया। इसको लेकर विवाहिता का पति, ससुर शंकर, सास जमुना देवी व ननद रंजिश रखने लगी।
इसी को लेकर आरोपियों ने एक राय होकर 16 जून 2017 की रात गला दबाकर विवाहिता की हत्या कर दी। हत्या के समय विमला तीन माह की गर्भवती थी। पुलिस ने मामले में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से विवाहिता के पिता समेत कई गवाह न्याय में पेश किए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने पति, सास व ससुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साक्ष्य के अभाव में ननद को दोषमुक्त करार दिया।
छेड़खानी के दोषी को तीन साल की सजा
पीलीभीत। छेड़खानी के एक मामले में विशेष न्यायाधीश (पाॅक्सो एक्ट) गीता सिंह ने दोषी को तीन साल की सजा सुनाई। छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
घटना जहानाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 जुलाई 2016 की है। गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री गांव में ही एक दुकान पर बीड़ी का बंडल व माचिस लेने गई थी। आरोप था कि दुकान स्वामी लाला राम ने पुत्री के साथ छेड़खानी की। पुलिस ने वाद विवेचना आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्काें और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद मामले में सजा सुनाई। संवाद