शुक्रवार को लिफ्ट ट्रायल के लिए सवार होते कर्मी। संवाद
पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती व प्रसूताओं की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्ट पांच वर्ष में पांच दिन भी लगातार नहीं चल सकी। बुधवार को जब लिफ्ट की मरम्मत के बाद उस पर जिम्मेदार अफसर प्रथम तल से द्वितीय तल तक जाने के लिए चढ़े तो दस मिनट के लिए लिफ्ट बीच में ही फंस गई। बमुश्किल लिफ्ट खुलने के बाद जिम्मेदार लिफ्ट बाहर निकल पाए। हालांकि लिफ्ट अब ट्रायल पीरिएड के बाद ही आमजन के लिए खुल सकेगी, अभी आमजन व गर्भवती महिलाओं को रैंप का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
पीलीभीत जिला महिला अस्पताल की लिफ्ट पिछले पांच सालों में गर्भवती व प्रसूताओं को पांच दिन भी लाभ नहीं पहुंचा पाई। दर्द से करहाती महिलाओं को पांच साल बाद भी रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है। इस समय अंतराल में लिफ्ट संचालन के लिए कोई विशेष प्रयास भी नहीं किए गए। हाल ही में शासन से अनुमति मिलने के बाद लिफ्ट को दुरूस्त करने के बाद 15 दिन के ट्रायल पीरिएड के लिए शनिवार से इसका संचालन शुरू कर दिया गया। बुधवार को जब पौधोरोपण कार्यक्रम में शिरकत लेने पहुंचे डीएफओ, सीएमओ व सीएमएस सहित अन्य दस लोग लिफ्ट में ओवरवेट के चलते फंस गए तो कहीं जाकर जिम्मेदारों ने लिफ्ट नए सिरे से दुरूस्त कराने पर ध्यान दिया। लिफ्ट ठीक होने के बाद शुक्रवार को पूरे दिन ओवरवेट को लेकर इंजीनियर ट्रायल कराते रहे। लिफ्ट दुरूस्त होने के 15 दिन के ट्रायल पीरिएड के बाद ही आमजन व गर्भवती प्रसूता महिलाओं के लिए लिफ्ट का संचालन शुरू किया जाएगा। शुक्रवार को प्रसूता गर्भवती व अन्य मरीजो को रैंप का ही सहारा रहा।
वर्जन
लिफ्ट मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। लिफ्ट से पानी भी निकाला जा चुका है। मरम्मत के बाद अनुभवी स्टाॅफ कर्मचारियों के जरिए 15 दिन का ट्रायल कराया जाएगा। जिसके बाद ही लिफ्ट आमजन के लिए शुरू की जाएगी।
डॉ. राजेश कुमार, अधीक्षक जिला महिला अस्पताल