पीलीभीत। बाघों की बढ़ती संख्या से पीलीभीत टाइगर रिजर्व को सकारात्मक ऊर्जा मिली। इससे पर्यटन को तो नई ऊंचाइयां मिलीं, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकना भी विभाग के लिए चुनौती बन गया। नतीजतन इस साल 170 दिन के अंदर अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की बाघों के हमले में जान चली गई। इनमें अधिकतर घटनाएं कलीनगर क्षेत्र में तो दो मामले जंगल के अंदर हुए। हालिया घटना में बासखेड़ा निवासी पूरनलाल (55) को बाघ ने हमला कर मार डाला।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 72 से अधिक दर्ज की गई है। बेहतर संख्या को लेकर पीटीआर के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हुईं। इसका सबसे अधिक असर पर्यटन पर पड़ा। बाघों के अधिक दीदार से सैलानियों की आमद पिछले सत्र की अपेक्षा दोगुनी के नजदीक पहुंच गई लेकिन संख्या बढ़ने के साथ बाघों की सक्रियता भी बढ़ने लगी।
जंगल सीमा और उससे सटे इलाकों में बाघों की चहलकदमी बढ़ गई। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा होने लगा। बाघ के हमलों में मरने वालों की बात करें तो इस साल बृहस्पतिवार तक 170 दिनों में छह लोगों की जान चली गई।
बता दें कि पांच जनवरी को बाघ के हमले में जान जाने की पहली घटना हुई थी। इसके बाद 31 जनवरी, 19 फरवरी, 19 मार्च, 9 अप्रैल के अलावा बुधवार रात घटना हुई। इस समय विभाग की ओर से रोकथाम के प्रयासों के लिए जाल फेंसिंग का कार्य कराया जा रहा है।
संवेदनशील कई इलाकों में जाल फेंसिंग कराई गई है, लेकिन बजट के अभाव में अन्य इलाकों में अभी काम शुरू नहीं हो सका है। जिसके चलते बाघों का जंगल से बाहर आने का सिलसिला जारी है।
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वर्ष 2024 में इन लोगों की गई जान
तिथि नाम गांव
5 जनवरी स्वरूप सिंह उर्फ मट्टू पुरैनी दीपनगर
31 जनवरी गंगाराम जमुनिया
19 फरवरी पंकज पंडरी
19 मार्च धर्मेंद्र मल्लपुर खजुरिया
9 अप्रैल भोलेराम रानीगंज
19 जून पूरनलाल बासखेड़ा