बाघ को ट्रेंकुलाइज कराने को दुधवा से पहुंची दो हथिनी- वन विभाग
पूरनपुर। बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए हाथियों पर सवार होकर वन विभाग की टीम निकलेगी। दुधवा से प्रशिक्षित हथिनी चमेली और सुलोचना को लाया गया है। वहीं, बृहस्पतिवार को बाघ के पंजों के निशान गन्ना के खेत से सात किलोमीटर दूर मिले।
गांव शांतिनगर के किसान मुंशी प्रसाद को 28 अगस्त को मार डालने वाले बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने की अनुमति 18 सितंबर को मिली थी। अगले दिन बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए दुधवा से विशेषज्ञ डॉ. दया और डॉ. तल्हा ने गांव कबीरगंज के समीप गन्ना के खेत पर पहुंचे। वहां मचान पर दो दिन तक टीम डेरा जमाए रही। इस दौरान दो बार बाघ गन्ने के खेत से निकलकर भी आया, लेकिन विशेषज्ञों को उसे ट्रैंक्युलाइज करने मौका नहीं मिला। तीसरे दिन गन्ना के खेत में समीप पिंजरा भी लगाया गया। हालांकि बाघ पिंजरा के समीप तक नहीं पहुंचा। इसके बाद बाघ के गन्ना के खेत से चले जाने पर उसकी लोकेशन दो दिन तक नहीं लग सकी। बृहस्पतिवार को गांव कबीरगंज में गन्ना के खेत से करीब सात किलोमीटर दूर गांव भुरजनिया के समीप पंजों के निशान होने की सूचना पर टीम पहुंची।
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बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने के लिए दुधवा से प्रशिक्षित हथिनी चमेली और सुलोचना को मंगवाया गया है। अब हाथियों पर सवार होकर टीम बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने निकलेगी।
ललित कुमार, रेंजर संपूर्णानगर