बीसलपुर। क्षेत्र की छह चीनी मिलों पर नियंत्रण करने और 90 हजार से अधिक किसानों की गन्ने से संबंंधित समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी संभालने वाली सहकारी गन्ना विकास समिति में केवल दो स्थायी कर्मचारी हैं। कर्मचारियों की कमी का असर समिति के कामकाज पर पड़ रहा है।
सहकारी गन्ना विकास समिति के अधीन किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल बरखेड़ा, द्वारिकेश चीनी मिल फरीदपुर, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर, डालमियांं शुगर मिल निगोही और ललित हरि चीनी मिल पीलीभीत हैं। इन मिलों से जुड़े 90 हजार से अधिक किसानों की गन्ने की खेती से संबंधित समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी इसी समिति की है।
विभागीय अनदेखी के चलते समिति में काफी समय से मानक के अनुरूप स्टॉफ नही है। सचिव और लिपिक के अलावा कोई भी स्थायी कर्मचारी नहीं है। विभाग सामायिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर किसी तरह काम चला रहा है।
समिति में स्थायी कोष लिपिक तक नहीं है। गन्ना अधिनियम के अनुसार अस्थायी कोष लिपिक चेक नहीं काट सकता है, लेकिन कर्मचारी न होने से यहां अस्थायी कोष लिपिक ही चेक काटता है। नियमानुसार समिति के सभी 60 गन्ना केंद्रों पर गन्ने की तौल के दौरान एक-एक समिति कर्मचारी भी तैनात होना चाहिए।
इस समिति के किसी भी केंद्र पर समिति कर्मचारी तैनात नही किया जाता है, जिससे केंद्र पर गन्ने की तौल में पारदर्शिता नहीं बन पाती है। समिति में विभागीय वाहन भी नही है, जिसके कारण सचिव गन्ना केंद्रों का सघन निरीक्षण नही कर पाते हैं। (संवाद)
समिति से जुड़े हैं तीन जिलों के किसान
सहकारी गन्ना विकास समिति से पीलीभीत के अलावा शाहजहांपुर और बरेली जिले के भी गन्ना किसान जुड़े हैं। सर्वाधिक किसान पीलीभीत जिले की बीसलपुर तहसील के हैं। शाहजहांपुर जिले की तिलहर तहसील और बरेली जिले की फरीदपुर तहसील, नवाबगंज तहसील के किसान जुड़े हुए हैं।
समिति में स्थायी कर्मचारी केवल दो हैं। अस्थायी और सामायिक कर्मचारियों को लगाकर काम चला लिया जाता है। कोई काम प्रभावित नहीं होता है। गन्ना किसानों को भी कोई दिक्कत नहीं होने दी जाती है।
- राजेश कुमार, सचिव सहकारी गन्ना विकास समिति बीसलपुर