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Pilibhit News: जंगल से गांव तक गूंजने लगी पर्यटन की दस्तक

Sun, 28 Sep 2025 07:46 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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पीलीभीत। हरियाली से आच्छादित जंगल, नहर पार करते बाघ और चूका बीच पर लहरों संग आती ठंडी हवा...। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का यही आकर्षण अब सिर्फ सैलानियों के दिलों को ही नहीं लुभा रहा, बल्कि जिले के गांव-गांव तक उम्मीदों की नई किरण जगाने लगा है। पर्यटन का यह सफर अब जंगल से निकलकर गांवों की चौपालों तक पहुंच चुका है। यही वजह है कि हर साल सैलानियों की आमद नए रिकॉर्ड बना रही है और उनकी आमद से लोग रोजगार पाकर खुश हो रहे हैं।
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जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल पीटीआर की महोफ रेंज में स्थित चूका बीच है। इसके अलावा जंगल सफारी के दौरान सप्तसरोवर, साइफन, बाइफरकेशन समेत कई अन्य प्वाइंट भी बनाए गए हैं, जहां सैलानियों को भ्रमण कराया जाता है। वहीं, जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बीते कुछ वर्षों से इको टूरिज्म पर भी काम शुरू हुआ है।
इससे पीलीभीत टाइगर रिजर्व आने वाले सैलानियों की आमद भी बढ़ी है। विदेशी सैलानियों की संख्या में भी इजाफा हुआ। उधर गोमती उद्गम स्थल, शारदा डैम, बंगाली समाज और अन्य स्थलों को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इससे जिले में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। दो सालों में दस नए होम स्टे भी बनकर तैयार हो गए।
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डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। बाघों की बेहतर मौजूदगी सैलानियों को काफी पसंद आती है। नए पर्यटन सत्र को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सैलानियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर कार्य कराए जा रहे हैं। पीटीआर में आने वाले सैलानियों की आमद की बात करें तो पिछले दो सत्रों से संख्या 35 हजार से बढ़कर 60 हजार तक पहुंच गई हैं। वहीं विदेशी सैलानियों की संख्या भी दो सौ तक पहुंची है।

बाघों की दहाड़ से गूंजा पर्यटन
पीटीआर में बाघों की बढ़ती मौजूदगी पर्यटन की धड़कन बन गई है। सफारी के दौरान जब कोई बाघ नहर से तैरकर निकलता है या टहनियों से खेलता है तो पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यही पल उन्हें बार-बार यहां खींच लाते हैं और यही पल पीलीभीत के पर्यटन को नई पहचान दे रहे हैं।

गांवों में जगी नई उम्मीदें
जहां कभी लोग खेती या मजदूरी तक ही सीमित थे, वहीं अब पर्यटन ने उनके लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। कोई गाइड बनकर सैलानियों को जंगल की कहानियां सुनाता है, तो कोई अपनी जिप्सी से उन्हें सफारी का रोमांच कराता है। घर-आंगन में बने होम स्टे अब गांव की खुशहाली के नए दरवाजे साबित हो रहे हैं। पर्यटन बढ़ने से जिले के लोगों को रोजगार भी मिला। निजी जिप्सी वाहनों से जंगल सफारी कराई जाती है। जहां बीते सत्रों में 50 जिप्सी थीं, वहीं अब संख्या 100 के पार पहुंच गई है। जंगल से सटे गांवों के युवाओं को गाइड बनाया गया है।

टेंट सिटी से बदलेगी तस्वीर
पिपरिया संतोष गांव में बनने वाली टेंट सिटी सिर्फ पर्यटन का नया पड़ाव नहीं होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कारोबार का बड़ा जरिया बनेगी। यहां आने वाले सैलानी जब गांव की गलियों से गुजरेंगे तो स्थानीय संस्कृति और परंपरा से भी रूबरू होंगे।

नए सत्र से नई उम्मीदें
अगले पर्यटन सत्र की शुरुआत में अब 34 दिन शेष हैं। पीटीआर प्रशासन ने कमर कस ली है। जंगल की सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं पर काम हो रहा है। उम्मीद की जा रही है कि यह सत्र फिर से पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या लेकर आएगा और पीलीभीत को पर्यटन के मानचित्र पर और चमकदार बनाएगा। शारदा डैम की किनारे बना चूका बीच मिनी गोवा का अहसास करता है।

गोमती और शारदा डैम भी खास
जंगल से बाहर की बात की जाए तो माधोटांडा क्षेत्र में ही गोमती नदी का उद्गम स्थल है। यहां की नजारा भी सैलानियों को काफी पसंद आती है। वहीं 22 किलोमीटर लंबा शारदा डैम भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है। इन दोनाें स्थानों पर वैसे तो साल भर सैलानियों की आमद होती है, लेकिन पर्यटन सत्र के दौरान रौनक अधिक बढ़ जाती है।
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