बाइफरकेशन क्षेत्र में पानी से बिजली तैयार करने की कवायद सपा सरकार के कार्यकाल में भी पूरी नहीं हो सकी। इस प्रोजेक्ट के लिए विद्युत विभाग ने पावर हाउस बनाने के लिए स्थान का चयन भी कर लिया था लेकिन सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते यह प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमट कर रह गया।
यह था बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट
बिजली उत्पादन को लेकर बिजली विभाग के आला अफसरों ने प्रोजेक्ट तैयार किए थे, उसमें एक माधोटांडा रजवाहा के निकट हरदोई ब्रांच पर जबकि दूसरा प्रोजेक्ट चित्तरपुर के निकट और तीसरा प्रोजेक्ट डूडा पुल के निकट बनाया गया। ऐसे में इस पूरी नहर पर तीन बिजली उत्पादन इकाई बनाने की योजना थी।
सिंचाई विभाग खींचता रहा हाथ
बिजली प्रोजेक्ट को लेकर सिंचाई विभाग शुरू से ही अपने हाथ खींचता रहा है। शुरुआती दौर में सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना था कि नहर पर हर जगह बाईपास चैनल बनाना मुश्किल होगा। पानी की डिमांड न होने पर नहर को बंद भी करना पड़ता है। बिजली उत्पादन के लिए यदि पानी लगातार दिया गया तो यह पानी कहां जाएगा। इसके अलावा शारदा सागर डैम के हेड से निकलने वाली सबसीडरी ब्रांच, जिस पर डेढ़ मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट बनाया गया था। इस नहर का हेड पर फाटक खराब होने की बात कही गई थी। माना जा रहा था कि यदि बजट का रोड़ा नहीं आया तो सपा सरकार के इसी कार्यकाल मेें प्रदेश को भी पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की तरह बिजली मिल सकेगी।
पहले भी हुई थी बिजली उत्पादन की कवायद
हरदोई ब्रांच नहर पर करीब चार दशक पहले माधोटांडा रजवाहा के निकट बिजली बनाने की कवायद शुरू हुई थी। उस दौरान बिजली घर, बाईपास चैनल बनाने समेत सभी औपचारिकताएं भी बिजली विभाग ने पूरी कर ली थी, लेकिन सिंचाई विभाग से वहां भी अंतिम समय में एनओसी नहीं मिलने की वजह से मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।