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Pilibhit News: 56.88 करोड़ से संवरेगा उद्गम स्थल, गोमती को मिलेगा पुनर्जीवन

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​गोमती नदी का उद्गम स्थल। संवाद
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पीलीभीत। उद्गम स्थल पर दम तोड़ती गोमती को पुनर्जीवन मिला है। उद्गम स्थल के संरक्षण, संवारने और गोमती के पुनर्जीवन पर 56.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दे दी है। उद्गम स्थल पर कराए जाने वाले कार्यों के मॉडल फोटो भी जारी किए हैं। माधोटांडा के पास फुलहर झील से आदि गंगा गोमती का उद्गम हुआ है।
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प्रदेश की राजधानी लखनऊ की शान बढ़ाने वाली गोमती नदी का उद्गम स्थल जिले के माधोटांडा कस्बे में है। तमाम प्रयासों के बाद भी कई सालों से गोमती नदी में अविरल धारा नहीं बह सकी। वहीं, करीब सात साल पूर्व जिला प्रशासन की कवायद के बाद उद्गम स्थल पर विभिन्न विकास कार्य कराए गए। परिसर के जीर्णोद्धार के साथ हॉल और झील क्षेत्र में पाथ-वे विकसित किए गए। मुख्य झील के सामने मां गोमती मैया का मंदिर भी स्थापित किया गया। इससे उद्गम स्थल की पर्यटन के रूप में पहचान बढ़ी।
इधर, गोमती के पुनर्जीवन के साथ ही उद्गम स्थल पर विकास की दिशा में अन्य कार्य कराने को लेकर पूर्व में केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद आगे आए। स्थानीय लोगों की मांग के बाद उन्होंने पत्राचार के साथ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मिलकर विस्तृत बातचीत भी की थी। शनिवार को विभिन्न कार्यों को लेकर जल शक्ति मंत्रालय की ओर से डीपीआर को मंजूरी दी गई है। मंत्रालय ने 50.88 करोड़ की स्वीकृति दी है। इस राशि से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने के लिए कंसल्टेंसी जारी कर दी गई है।
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परियोजना के तहत यह कराए जाएंगे प्रमुख कार्य
- गोमती नदी के उद्गम स्थल का संरक्षण और सौंदर्यीकरण
- घाटों का निर्माण एवं पाथ-वे का विकास
- हरित क्षेत्र, पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण कार्य
- सांस्कृतिक एवं धार्मिक परिसर का विकास
- पर्यटकों के लिए सुविधा केंद्र एवं आधारभूत ढांचा
- स्थानीय हस्तशिल्प, आजीविका एवं पर्यटन को बढ़ावा
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पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार से जुड़ेंगे स्थानीय लोग
- परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही गोमती नदी के उद्गम स्थल को एक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और आकर्षक धार्मिक-पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। मंजूरी मिलने से गोमती भक्त निर्भय सिंह, रामौतार सिंह, घनश्याम सिंह आदि ने केंद्रीय राज्यमंत्री का आभार जताया।

यह परियोजना न केवल गोमती नदी की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, पर्यटन संवर्धन और स्थानीय रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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- जितिन प्रसाद, केंद्रीय राज्यमंत्री/सांसद।

गोमती नदी का उद्गम स्थल। संवाद

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