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Pilibhit News: नगफन विद्यालय में तीन साल से छात्र संख्या शून्य, तैनात हैं तीन शिक्षक

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बीसलपुर के प्राथमिक विद्यालय दुबे में बच्चों को पढ़ाते ​शिक्षक  संवाद - फोटो : जिला सहकारी बैंक में आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष को स्मृति चिन्ह देते डा. भूदेव राजपूत, व पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार।
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पीलीभीत। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकाें की तैनाती का हाल भी अजब-गजब है। कहीं एक शिक्षक के जिम्मे 100 से अधिक बच्चे तो कहीं शिक्षक कई और छात्र एक भी नहीं है। मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय नागफन में तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र की तैनाती है। विद्यालय में तीन शिक्षा सत्रों से एक भी बच्चे का पंजीकरण नहीं है। अमरिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय जगत में एक शिक्षक और शिक्षामित्र की तैनाती है। विद्यालय में बच्चे सिर्फ दो हैं। वहीं बीसलपुर के दुबे प्राथमिक विद्यालय में 118 बच्चों की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर है।
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दावा खोखला, एक भी छात्र का पंजीकरण नहीं करा सका विभाग
गजरौला। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार प्रत्येक वर्ष स्कूल चलो अभियान रैली और अन्य जागरूकता कार्यक्रम करते हैं। परिषदीय स्कूलों में पंजीकरण का दावा करते हैं। मगर यह दावा खोखला है। विभाग मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय नगफन रसोइया में पिछले तीन वर्षों में एक भी पंजीकरण नहीं करा सका है, जबकि विद्यालय में चार अध्यापक हैं। इनमें मुनेंद्र पाल सिंह प्रधान अध्यापक हैं।
पीतांबर बाबू और नन्हे बाबू सहायक अध्यापक पद पर हैं। शिक्षामित्र मंजीत कौर की तैनाती है। वह बीएलओ का कार्य भी देखती हैं। विद्यालय में पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों से एक भी बच्चे का पंजीकरण नहीं है। बताया जा रहा है कि प्रधानाध्यापक मुनेंद्र पाल सिंह को जिला कारागार पीलीभीत से संबद्ध कर दिया गया है। बाकी दो शिक्षक और शिक्षामित्र स्कूल आते हैं। हालांकि मंगलवार की दोपहर विद्यालय खुला था, लेकिन कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। संवाद
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शून्य छात्र संख्या की यह वजह बता रहे शिक्षक
शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय क्षेत्र में आबादी कम है। गांव सिख बहुल है। कई परिवार विदेेशों में बस गए हैं। प्रयास किया जाता है, लेकिन छात्र नहीं मिलते। क्षेत्र में जो छात्र हैं। उनके परिजनों ने निजी विद्यालयों में छात्रों का नाम लिखा रखा है।




शिक्षक और शिक्षामित्र के जिम्मे सिर्फ दो बच्चे
अमरिया। ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जगत में एक शिक्षक और शिक्षामित्र की तैनाती है। स्कूल में सिर्फ दो बच्चों का पंजीकरण है। इसमें एक कक्षा एक और एक छात्र कक्षा चार में पढ़ रहा है। यह दोनों छात्र भी नियमित स्कूल नहीं आते। शिक्षक घरों में जाकर उन्हें बुलाकर लाते हैं।
प्रधानाध्यापक वैभव कनौजिया ने बताया कि स्कूल में शिक्षामित्र वीरमती की तैनाती भी है। बच्चे सिर्फ दो हैं। रोजाना बुलाने जाना पड़ता है। बच्चों के कम होने के बारे में उनका कहना है कि गांव में आबादी कम है। सिख बहुल गांव में कक्षा एक से पांच तक पढ़ाई के लिए निर्धारित आयु वर्ग के बच्चे सिर्फ 12 से 13 ही हैं।
मंगलवार की दोपहर स्कूल तो खुला था, लेकिन यहां भी शिक्षक, शिक्षामित्र और कोई बच्चा नहीं था। प्रधानाध्यापक ने बताया कि वह अवकाश पर हैं। शिक्षामित्र ने स्कूल खोला था, वह भी स्वास्थ्य खराब हो जाने से चली गई थी। ब्लॉक क्षेत्र के ही प्राथमिक विद्यालय डबका में एक शिक्षक और दो शिक्षामित्रों पर सिर्फ दो छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। यहां भी एक छात्र कक्षा एक और एक चार में पंजीकृत है। संवाद




दुबे विद्यालय में 118 बच्चे, शिक्षक सिर्फ एक
बीसलपुर। नगर के प्राथमिक विद्यालय दुबे में 118 बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा सिर्फ एक शिक्षक सौरभ बाजपेयी पर है। विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर नहीं है। बच्चे जमीन पर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। एक शिक्षक जैसे-तैसे विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था चला रहा है। संवाद



नगफन स्कूल के एक शिक्षक को जेल से संबंद्ध किया गया है। एक शिक्षक को वहीं रोका गया है। प्राथमिक विद्यालय जगत और डबका के बारे में जानकारी नहीं है। पता कराएंगे। कुछ व्यवस्था की जाएगी। - अमित कुमार सिंह, बीएसए

बीसलपुर के प्राथमिक विद्यालय दुबे में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक  संवाद- फोटो : जिला सहकारी बैंक में आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष को स्मृति चिन्ह देते डा. भूदेव राजपूत, व पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार।

बीसलपुर के प्राथमिक विद्यालय दुबे में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक  संवाद- फोटो : जिला सहकारी बैंक में आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष को स्मृति चिन्ह देते डा. भूदेव राजपूत, व पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार।

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