शारदा नदी में पिछले वर्षों की तरह इस बार बाढ़ तो नहीं आई, लेकिन नदी ने एक दो गांवों में भू-कटान कर कृषि भूमि का सफाया कर दिया। नदी में बाढ़ न आने से सिंचाई महकमे ने भी राहत की सांस ली है, लेकिन बदले हालात ने महकमे को नये इलाकों में भूकटान से बचाने को प्रोजेक्ट बनाने को मजबूर कर दिया है।
शारदा नदी में कई नदी-नाले मिलकर हर साल क्षेत्र में भारी तबाही मचाते हैं। इस वर्ष भी ऐसी ही आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है। जहां रमनगरा बुझिया में दाएं किनारे पर कटान से दर्जनों किसान भूमिहीन हो गए, वहीं शारदा डैम के सामने नलडेंगा क्षेत्र में वर्षों पुराने डैम की सुरक्षा को बने स्परों के आधे भाग को भी नदी ने निगल लिया। गनीमत यह रही कि कटान के दौरान लगातार जलस्तर नीचे गिरता गया और वहां नदी ने रेत के ढेर छोड़ दिए हैं। हालांकि, बाढ़ खंड ने नौजल्हा नंबर दो व नगरियाखुर्द में स्पर व बांध बनाकर पिछले वर्षों की तरह हो रही तबाही को रोकने में सफलता हासिल की।
वर्जन:
शारदा नदी के दांये तट पर नौजल्हा, कुतिया कवर, नगरियाखुर्दकलां पिछले कई वर्षों से शारदा से प्रभावित रहते थे। अब कुछ नये इलाकों में शारदा ने कटान कर नुकसान पहुंचाया है। वहां बरसात खत्म होने के बाद सर्वे कराकर स्थायी स्पर बनाने को प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
- मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड