नगरिया खुर्द क्षेत्र में कटे ठोकर के भाग पर कराई जा रही मरम्मत। संवाद
कलीनगर। शारदा में अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी है, लेकिन नगरिया खुर्द कला में जंगल भौजी से सटे दाहिने तट पर बनाई गई ठोकर (स्पर) का अपस्ट्रीम हिस्सा कटने लगा है। ठोकर की नोज को सहारा देने के लिए लगाए गए पत्थरों का सपोर्ट कमजोर पड़ने के बाद बाढ़ खंड ने आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू कराया है। मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से पत्थर पहुंचाए जा रहे हैं, जबकि रेत से भरे सीमेंट के खाली बोरे और वायर क्रेट के जरिये क्षतिग्रस्त हिस्से को बचाने की कोशिश की जा रही है।
तहसील क्षेत्र में शारदा नदी नगरिया क्षेत्र में पहले भी बाढ़ परियोजना को भी क्षतिग्रस्त कर चुकी है। इस बार नदी में बाढ़ के हालात नहीं बने हैं। लेकिन, पिछलों दिनों हुई बारिश के बाद नदी में 1.40 लाख क्यूसेक तक पानी पास किया गया है, इसके चलते ही नदी बाढ़ परियोजना को नुकसान पहुंचाने लगी है।
बाढ़ खंड की ओर से पुरानी क्षतिग्रस्त ठोकर को मजबूत बनाने के लिए इसकी नोज पर वायर क्रेट में पत्थर भरकर लगाए गए थे। साथ ही नदी की ओर एप्रन में बड़ी संख्या में जियो बैग बिछाए गए थे। दावा किया गया था कि इससे नदी के तेज बहाव के दौरान भी ठोकर सुरक्षित रहेगी, लेकिन बाढ़ आने से पहले ही इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर लगातार आपत्तियां उठाई गई थीं। आरोप लगाया गया था कि एप्रन में निर्धारित मानक के अनुरूप परतें नहीं डाली गईं। कहीं दो तो कहीं तीन परतों में ही जियो बैग बिछाकर काम पूरा दिखा दिया गया। उस समय विभागीय अधिकारियों ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।
कुछ दिन पहले प्रदेश के सिंचाई मंत्री ने भी इस स्थल का निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के निर्देश दिए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद यदि बाढ़ से मजबूत ठोकर को नुकसान पहुंच रहा है तो निर्माण की गुणवत्ता खुद सवालों के घेरे में है। बाढ़ खंड अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार ने बताया कि नदी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। संवेदनशील स्थान पर मरम्मत कार्य कराए जा रहे हैं।