पीलीभीत। पीटीआर की माला रेंज में शनिवार सुबह गश्त के दौरान एक बाघिन घायल अवस्था में मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों की मदद से घेराबंदी कर बाघिन का सुरक्षित रेस्क्यू किया। फिलहाल, माला रेंज कार्यालय परिसर में उसका उपचार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में बाघिन के किसी अन्य बाघ से संघर्ष में घायल होने की आशंका जताई जा रही है। बाघिन के कान के पास घाव मिला है, उसमें कीड़े पड़े है। ऐसे में इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि बाघिन को कई दिन पहले चोट लगी है। वन विभाग के अनुसार, बाघिन की उम्र आठ साल की बताई जा रही है।
शनिवार सुबह करीब पांच बजे वनकर्मी माला रेंज में नियमित गश्त पर थे। इसी दौरान जंगल में एक बाघिन घायल हालत में दिखाई दी। सूचना मिलते ही पीटीआर के डीएफओ मनीष सिंह, रेंजर आरके सिंह और विभागीय पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के बाद बाघिन को सुरक्षित रेस्क्यू करने की योजना बनाई गई।
विभाग ने बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के बजाय सामान्य रेस्क्यू तकनीक अपनाई। तीन ओर जाल लगाकर हाथियों की मदद से घेराबंदी की गई, जबकि एक ओर पिंजड़ा लगाया गया। काफी मशक्कत के बाद टीम ने बाघिन को सुरक्षित पिंजड़े में कैद कर माला रेंज कार्यालय परिसर पहुंचाया।
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बाघिन के कान के पास गहरा घाव मिला। चोट के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है, हालांकि प्रथम दृष्टया किसी दूसरे बाघ से संघर्ष में घायल होने की संभावना मानी जा रही है। घायल बाघिन का उपचार पीटीआर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार की देखरेख में किया जा रहा है। उसकी निगरानी के लिए डीएफओ मनीष सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो 24 घंटे बाघिन के स्वास्थ्य और गतिविधियों पर नजर रख रही है।