बीसलपुर रासलीला में सत्यवादी राजा हरिशचंद्र लीला का किया गया मंचन।संवाद
बीसलपुर। रासलीला में शुक्रवार को सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की लीला का मंंचन हुआ।
लीला में दर्शाया गया कि जब राजा हरिश्चंद्र की सत्यवादिता की चर्चा बढ़ी तो भगवान ने उनकी परीक्षा लेने की ठानी। इसके लिए ऋषि विश्वामित्र को परीक्षा लेने के लिए भेजा। ऋषि विश्वामित्र ने सपने में राजा हरिश्चंद्र से वचन लिया और सारा राजपाठ ले लिया।
इसके बाद ऋषि विश्वामित्र राजा हरिश्चंद्र के दरबार में पहुंचे। वचन के अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने अपना सारा राजपाट उन्हें सहर्ष दे दिया, बाद में विश्वामित्र ने उनसे दक्षिणा मांगी। इस पर दक्षिणा देने के लिए हरिश्चंद्र ने स्वयं को, पत्नी तारा और पुत्र रोहिताश को अलग-अलग लोगों के पास गिरवी रख दिया और उससे मिली धनराशि उन्होंने दक्षिणा के रूप में दे दी। इसके बाद हरिश्चंद्र श्मशान में ठेकेदार के पास, पत्नी और पुत्र दूसरी जगह नौकरी करने लगे।
इसी दौरान रोहिताश की मृत्यु हो गई। तारा अपने पुत्र के शव का अंतिम संस्कार उसी श्मशान में करने गई, जहां उनके पति नौकरी कर रहे थे। हरिश्चंद्र ने अपने मालिक की आज्ञा के अनुसार तारा से शव का अंतिम संस्कार करने के एवज में शुल्क मांगा। तारा के पास शुल्क देने के लिए राशि नहीं थी, इसपर तारा शुल्क के एवज में अपनी साड़ी का कुछ हिस्सा फाड़कर पति को देने लगी।
इसी बीच भगवान प्रकट हो गए। उन्होंने हरिश्चंद्र से कहा कि वह उनकी परीक्षा ले रहे थे, जिसमें वह पूरी तरह सफल हो गए। उसके बाद भगवान ने उनका सारा राजपाट उन्हें वापस कर दिया और उनके पुत्र को भी जीवित कर दिया। यहीं लीला को विश्राम दे दिया गया।