दियोरिया/ बिलसंडा/भुता। दीपावली से एक दिन पहले बरेली के बीसलरोड पर हुए सड़क हादसे ने पीलीभीत जिले के तीन मजदूर पेशा परिवारों की खुशियां छीन लीं। मथुरा में धान की कटाई कर लौट रहे मजदूरों की वैन वैन वहां टूरिस्ट बस से टकरा गई। दीपावली पर तीनों के परिवार में खुशी का माहौल था जो अब मातम में बदल गया है।
दियोरिया के गांव पकड़िया निवासी सुधीर ने बताया कि उनका भाई राकेश कुछ समय से बरेली के छोटी बिहार इलाके में परिवार के साथ रहने लगा था। राकेश अपनी ईको वैन चलाता था। शुक्रवार को वह दियोरिया में लगा मेला देखने बाइक से परिवार के संग गांव आया था। शाम को बच्चों को गांव में छोड़कर पत्नी को लेकर बाइक से बरेली लौट गया था। शुक्रवार देर रात मथुरा से लौटे पकड़िया और बिलसंडा क्षेत्र के गांव परेवा तुर्रा के कई लोगों ने बस न मिलने पर राकेश को कॉल की।
परिचित होने की वजह से राकेश अपनी वैन लेकर उन लोगों के पास पहुंचा। इसके बाद 13 लोग वैन में सवार होकर गांव को रवाना हुए। बरेली-बीसलपुर रोड पर भुता के पास वैन और बस की टक्कर हो गई। हादसे में राकेश के अलावा मथुरा से लौटे गौरव (19) निवासी गांव लाम्हुआ, जितेंद्र (32) निवासी परेवातुर्रा की मौत हो गई। दस लोग घायल हो गए।
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घटनास्थल पर पहुंचे तीन गांव के लोग
हादसे की सूचना मिली तो तीनों गांवों के लोग घटनास्थल व बरेली के निजी अस्पताल की ओर चल दिए। शनिवार को तीनों गांवों में सन्नाटा पसरा रहा। मृतकों के घर दिन भर लोग सांत्वना देने पहुंचते रहे। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। दीपावली पर गम का पहाड़ टूटने से हर आंख नम दिखी। शाम ढले शवों को बरेली में पोस्टमार्टम के बाद गांव लाया जा सका।
धान कटाई करने एक महीने पहले गए थे मजदूर
ग्रामीणों ने बताया कि दियोरिया और बिलसंडा क्षेत्र के कई लोग मजदूरी पर धान की कटाई करते हैं। ये लोग इसी सिलसिले में एक महीने पहले ठेकेदार की ओर से तय होकर मथुरा गए थे। दीपावली पर सभी लोग हंसी खुशी घर लौट रहे थे लेकिन हादसे ने त्योहार की खुशियां निगल लीं।
गौरव और जितेंद्र थे अविवाहित, राकेश की मौत से बच्चों का बुरा हाल
- हादसे ने कई परिवारों को ऐसा दुख दिया, जिसको वह जीवन भर नहीं भुला पाएंगे। परिजनों के अनुसार राकेश के परिवार में पत्नी अंकिता देवी के अलावा एक 11 वर्षीय पुत्र शीलू व आठ वर्षीय पुत्र अंबिका शामिल हैं। हादसे के बाद राकेश के परिजन बदहवास हैं। वहीं मृतक गौरव अविवाहित था। वह चार बहन और तीन भाई में सबसे छोटा था। मृतक जितेंद्र के माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। वह इकलौता था और बिलसंडा के परेवा तुर्रा गांव में अपने चाचा मुन्नालाल के पास रहता था।