गांवों में होने वाले छोटे-मोटे विवाद बड़ा रूप ले लेते हैं, जिन्हें गांव में ही आपसी समझौते से निपटाया जा सकता है। इसके लिए डीजीपी के आदेश पर ग्राम पंचायत स्तर पर एस सेवन और एस टेन टीम गठित की गई है। गांवों में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए 10 लोगों की टीम बनाई है। चुनाव में संभ्रांत लोगों की मदद लेने के लिए कम्युनिकेशन रजिस्टर तैयार हो गया। डीआईजी खुद स्कीम की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
पंचायत चुनावों में कोई दखल न हो। इसके लिए शासन स्तर से लगातार गाइड लाइनें जारी हो रहीं है। डीजीपी के आदेश पर जिले में एस सेवन, एस टेन स्कीम लागू कर दी गई। एस सेवन स्कीम में वर्तमान प्रधान, भूतपूर्व प्रधान, चौकीदार, बीट आरक्षी, कोटेदार और शिक्षा मित्रों को शामिल किया गया है। एस सेवन में शामिल लोग गांवों में होने वाले छोटे-मोटे विवादों को पहले ग्राम पंचायत स्तर पर निपटाएंगे। विवाद न निपटने की स्थित में एसआई, एसओ निपटाने का प्रयास करेंगे। अगर फिर भी निपटारा नहीं होता है तो एसडीएम और सीओ विवाद का निस्तारण करेंगे। इसी तरह एस टेन में टीम में पांच हिंदू और पांच मुसलमान शामिल किए गए हैं। यदि गांव में सांप्रदायिकता को लेकर कोई मामला है तो यह टीम मामले को निपटाने का प्रयास करेंगे और अधिकारियों को मामले की सूचना देंगे और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर पहुंचने तक शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा एक कम्युनिकेशन रिजस्टर भी तैयार कराया गया है, जिसमें मतदान केंद्रों के आसपास रहने वाले 10 संभ्रांत लोगों के नाम और मोबाइल नंबर अंकित किया गया है। अधिकारी मतदान केंद्रों का इन नंबरों पर कॉल कर हालातों पर नजर रखेंगे। जिले स्तर पर इसको लेकर एक बुकलेट बनाई गई है। डीआईजी इसकी खुद सर्किलवार समीक्षा कर रहे हैं।