अमरिया। खेत में बने छोटे से तालाब में मछली पकड़ रहे ग्रामीण को उस समय जान के लाले पड़ गए जब मगरमच्छ ने उसका पैर दबोच लिया। वह चीखा तो उसके साथी दौड़ पड़े। मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाकर अस्पताल में भर्ती कराया।
कटमटी गांव निवासी रमेश के खेत में हररायपुर निवासी ग्रामीण प्रमोद कुमार मंगलवार को सुबह नौ बजे मछली पकड़ रहा था। मछली का जाल डाला गया। मछली तो मिलीं लेकिन साथ मगरमच्छ भी आ गया। मगरमच्छ ने उसका पैर दबोच लिया। आसपास के लोगों ने बताया कि कुछ ही दूरी पर अप्सरा नही बह रही है और नाले के जरिए खेतों तक मगरमच्छ पहुंच जाते हैं।
अप्सरा नदी में सैकड़ों मगरमच्छ रहते हैं। इसी से निकला एक मगरमच्छ खेत में बने तालाब में पहुंच गया। किसी तरह साथियों ने प्रमोद का पैर मगरमच्छ से छुड़ाया और उसे लेकर लोग अमरिया के सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर जाने दिया गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली।
शोर मचाने पर भागता है मगरमच्छ - वन दरोगा शैलेंद्र कुमार और सोनी सिंह ने बताया कि मगरमच्छ गंदे पानी में रहता है। आमतौर पर शोर-शराबा होने पर भागता है। इसलिए अगर कहीं मगरमच्छ हो तो शोर मचाएं। वन दरोगा सोनी सिंह ने बताया कि मगरमच्छ गोबर खाने का ज्यादा शौकीन होता है। इसलिए यह नदी नालों से गांव की ओर भागता है।
जख्मी ग्रामीण को आर्थिक मदद दिए जाने के बारे में मेडिकल रिपोर्ट को आधार माना जाता है। डाक्टर की मेडिकल रिपोर्ट लेकर आख्या उच्च अधिकारियों के पास भेजी जाएगी।
- शैलेंद्र सिंह, वन दरोगा