जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण बदलने के साथ राजनीति गलियारा भी गर्मा गया है। पूरनपुर क्षेत्र के एक एक जनप्रतिनिधि ने अपने बेटे की कोर्ट मैरेज क्या कराई, चर्चाओं का दौर चल पड़ा। लोगों का कहना है कि अनुसूचित जाति महिला सीट होने के चक्कर में जल्दी में शादी करवाई गई। नई बहू अब जिला पंचायत अध्यक्ष का दावा करेगी। फिलहाल सच्चाई कुछ दिनों में सामने आ जाएगी।
जिले की राजनीति में वंशवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने हुए एक जनप्रतिनिधि ने जिलाध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के कोटे में जाने की संभावना पर तीन दिन पूर्व अपने बेटे को चुनाव मैदान में उतारने के लिए समर्थकों के साथ देर रात तक बैठक कर रणनीति बनाई थी। लेकिन अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होते ही उनकी रणनीति ध्वस्त हो गई। नेता जी किसी भी कीमत पर मैदान से हटने को तैयार नहीं। इसी चक्कर में उन्होंने अपने डाक्टर पुत्र की कोर्ट मैरिज कराने का निर्णय लिया और सुबह होते ही वधू पक्ष से संपर्क कर आननफानन में बेटे की कोर्ट मैरेज करा दी गई। हालांकि गोपनीय तरीके से हुई इस शादी में चार छह लोग ही शामिल हुए लेकिन बृहस्पतिवार को समाचार पत्रों में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित होने की खबर मिलने के बाद शहर मेें चर्चा तेजी से फैलने लगी कि आखिर इतनी जल्दी क्या थी। संभव हो कि नेता जी अपनी बहू को चुनाव मैदान में उतारें। उम्मीद की जा रही कि जल्द ही मेंहदी लगे हाथ जोड़कर वोट मांगते नजर आएंगे।