बरखेड़ा ब्लॉक के पैनिया रामकिशन के पंचायत सचिवालय में खड़ा कृषि यंत्र। संवाद
पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये से बने सचिवालयों में प्रशासनिक, डिजिटल और जन-कल्याणकारी सेवाएं मिलने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। इस वजह से कई ग्राम पंचायतों में लोगों को बाहर व तहसीलों तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
शासन स्तर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में सचिवालय बनाए जाने के निर्देश दिए गए। 15 लाख रुपये की अधिक लागत से बनाए गए सचिवालयों में कंप्यूटर, वाई-फाई, लाइब्रेरी सहित अन्य इंतजाम किए गए हैं। इसके बाद भी अधिकांश ग्राम पंचायतों के सचिवालयों में हाल खराब है। यहां कंप्यूटर, प्रिंटर मशीन आदि का पता तक नहीं है, जिससे लोगों के आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल सहित अन्य ऑनलाइन कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अफसराें के निरीक्षण के दौरान यह व्यवस्थाएं चाक चौबंद हो जाती है। उनके जाने के बाद व्यवस्था वैसी ही हो जाती है। अधिकांश पंचायत सचिवालयों का सामान प्रशासकों के घर में धूल फांक रहा है। यही नहीं पंचायत सहायक भी नियमित ड्यूटी नहीं दे रहे हैं। संवाद
बरखेड़ा ब्लॉक के पैनिया रामकिशन के पंचायत सचिवालय में खड़ा कृषि यंत्र। संवाद
बरखेड़ा ब्लॉक के पैनिया रामकिशन के पंचायत सचिवालय में खड़ा कृषि यंत्र। संवाद
बरखेड़ा ब्लॉक के पैनिया रामकिशन के पंचायत सचिवालय में खड़ा कृषि यंत्र। संवाद
बरखेड़ा ब्लॉक के पैनिया रामकिशन के पंचायत सचिवालय में खड़ा कृषि यंत्र। संवाद
बरखेड़ा ब्लॉक के पैनिया रामकिशन के पंचायत सचिवालय में खड़ा कृषि यंत्र। संवाद