पीलीभीत। हिंदुत्व की लहर के सहारे तीन बार सूूबे में सत्ता की गद्दी पर बैठ चुकी भाजपा के सामने जिले में इस बार अपना गढ़ बचाने की चुनौती है। वर्ष 1991 और 2017 में जिले चारों सीटों पर काबिज होने वाली भाजपा के सामने किसान, रोजगार, आवारा पशु और महंगाई का मुद्दा लेकर विपक्षी पार्टियां सेंधमारी की जुगत में जुटी हैं। वर्ष 1991 के मुकाबले 2017 में भाजपा का वोट शेयर जिले में जबरदस्त तरीके से बढ़ा है। इसे बरकरार रखना बड़ी चुनौती है। वर्ष 1991 के बाद से सदर सीट तीन बार भाजपा और तीन बार सपा की झोली में रही है। इसलिए सदर सीट पर मुकाबला कांटे का होता दिख रहा है।
वर्ष 1985 में कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाई। उस साल भाजपा बरेखड़ा सीट छोड़कर बाकी तीनों सीटों पर हारी थी। पूरनपुर में भाजपा के बालकराम को सिर्फ 877 वोट मिले जो एक फीसद वोट शेयर से भी कम था। वर्ष 1991 के चुनाव से पहले राम मंदिर का मुद्दा छिड़ गया था। अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर चल रहे आंदोलन का फायदा भाजपा को जिले में भी जबरदस्त तरीके से मिला। चारों सीटों पर औसत 36.9 फीसद वोट हासिल करते हुए भाजपा ने पहली बार चारों सीटों पर कब्जा किया। पीलीभीत सदर से बीके गुप्ता 48.30 फीसद वोट के साथ जीते जो बाकी सीटों के मुकाबले काफी ज्यादा वोट शेयर था। इसके बाद सदर सीट लगातार तीन बार भाजपा की झोली में गई।
1993 के चुनाव में भाजपा ने सरकार तो बनाई लेकिन जिले की एक सीट गंवानी पड़ी। पूरनपुर में भाजपा के प्रमोद कुमार हार गए। बाकी तीनों सीट पर भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल की। 1996 के चुनाव में भाजपा की जमीन जिले में खिसकने लगी। पार्टी को तीन सीटों का नुकसान हुआ। बरखेड़ा में किशन लाल, पूरनपुर में विनोद कुमार और बीसलपुर में राम सरन वर्मा को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2002 के चुनाव में भाजपा ने बसपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। 2002 सिर्फ पीलीभीत और पूरनपुर में ही भाजपा अपने प्रत्याशी उतार पाई। पार्टी सदर सीट नहीं बचा सकी और सपा के हाजी रियाज अहमद के सामने भाजपा के बीके गुप्ता हार गए। हालांकि लगातार दो बार हारने के बाद इस बार भाजपा पूरनपुर की सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही। पार्टी के लिए 2007 का चुुनाव बेहद खराब रहा। बाकी तीनों सीटों के साथ जीती हुई पूरनपुर की सीट भी गंवानी पड़ी। हालांकि पिछले चुुनाव के मुकाबले पार्टी को वोट शेयर बढ़कर 38.39 फीसद तक पहुंचा। इससे साफ था कि पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ा है।
वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा बीसलपुर में जीत दर्ज करने में कामयाब रही, लेकिन बाकी सीटों पर हार मिली। जीती हुई बरखेड़ा सीट भी गंवानी पड़ी। यहां भाजपा ने पहली बार स्वामी प्रवक्तानंद को उतारा था। इस साल पार्टी का वोट शेयर भी घटा और जिले में औसत वोट शेयर 27.48 फीसद रह गया। जो पिछले चुनाव के मुकाबले करीब बारह फीसद कम था। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान राम मंदिर का मु्द्दा काफी गरम रहा था। भाजपा ने इसे भुनाया। मोदी और हिंदुत्व की लहर में भाजपा ने करीब 26 साल बाद जिले की चारों सीटों पर कब्जा किया। इस बार वोट शेयर भी डेढ़ गुना ज्यादा बढ़ा। भाजपा ने जिले की चारों सीटों पर औसत 50.98 फीसद वोट हासिल किए। अब इस बार विपक्ष के पास तमाम मुद्दे हैं जिससे पार पाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। जिले की चारों सीटों पर इस बार कांटे की टक्कर होती दिख रही है।
चारों सीटों पर इस बार कांटे की टक्कर
पीलीभीत किसान बहुल क्षेत्र है। हालांकि यहां चुुनाव में जातीय गणित ज्यादा प्रभावी रहा है। कृषि कानून, किसानों को कुचलने और विकास न होने के साथ-साथ बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे लेकर दूसरे दल के प्रत्याशी भाजपा पर लगातार हमलावर हो रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा अयोध्या में मंदिर बनाने, किसानों को बिजली फ्री देने और मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने, 14 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान कराने जैसे वायदों के साथ मैदान में है। सदर, बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर में इस बार कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है।
किस वर्ष बीजेपी ने जिले में कैसा किया प्रदर्शन
वर्ष 1991
सीट -प्रत्याशी - जीत/हार - मत फीसद
पीलीभीत- बीके गुप्ता- जीत - 48.30
बरखेड़ा- किशन लाल- जीत - 38.86
बीसलपुर- राम सरन वर्मा- जीत- 32.65
पूरनपुर- प्रमोद कुमार- जीत- 27.79
जिले में औसत वोट शेयर-36.9
वर्ष 1993
पीलीभीत- बीके गुप्ता- जीत - 37.60
बरखेड़ा - किशन लाल - जीत -34.57
बीसलपुर -राम सरन वर्मा - जीत -32.68
पूरनपुर - प्रमोद कुमार - हार -17.94
जिले में औसत वोट शेयर -30.69
वर्ष 1996
पीलीभीत - राज राय सिंह - जीत - 30.35
बरखेड़ा-किशन लाल - हार - 28.84
बीसलपुर - राम सरन वर्मा - हार - 27.86
पूरनपुर -विनोद कुमार -हार -36.38
जिले में औसत वोट शेयर-30.85
वर्ष- 2002
पीलीभीत - बीके गुप्ता - हार - 20.92
पूरनपुर- डॉ. विनोद तिवारी - जीत - 26.48
जिले में औसत वोट शेयर-23.7
नोट- इस चुनाव में समय से बरखेड़ा और बीसलपुर पर उम्मीदवार नहीं उतार सकी थी।
वर्ष 2007
पीलीभीत - बीके गुप्ता - हार - 34.71
बीसलपुर - राम सरन वर्मा -हार -58.53
बरखेड़ा- सुख लाल - जीत - 43.46
पूरनपुर - डॉ. विनोद तिवारी - हार - 16.87
जिले में औसत वोट शेयर-38.39
2012
पीलीभीत - सत्यपाल -हार - 21.23
बरखेड़ा -स्वामी प्रवक्तानंद - हार -19.80
पूरनपुर - बाबूराम - हार- 19.21
बीसलपुर - राम सरन वर्मा - जीत - 49.71
जिले में औसत वोट शेयर - 27.48
2017
पीलीभीत - संजय सिंह गंगवार - जीत -54.59
बरखेड़ा -किशनलाल राजपूत - जीत -49.91
पूरनपुर - बाबूराम पासवान - जीत -52.54
बीसलपुर - राम सरन वर्मा -जीत - 46.91
जिले में औसत वोट शेयर-50.98