पीलीभीत। जिले के चावल निर्यातकों को ईरान-अमेरिका युद्ध में सीजफायर का कुछ खास लाभ नहीं हुआ। दुबई पोर्ट बंद होने से खाड़ी देशों में चावल ओमान और शारजाह के बंदरगाह पर भेजने से माल भाड़ा बढ़ गया है। चावल की कीमत में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। ईरान से आने वाली डिमांड पर चावल आपूर्ति से व्यापारी इन्कार कर रहे हैं।
जिले से बासमती चावल का कई देशों में निर्यात होता है। इनमें ईरान, दुबई, शारजाह, ओमान आदि देश शामिल हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध का असर चावल निर्यात पर पड़ा। व्यापारियों का चावल अलग-अलग बंदरगाह पर फंस गया था।चावल के दाम भी बढ़ गए थे। सीजफायर होने पर व्यापारियों ने राहत की उम्मीद जताई थी। मगर कुछ खास फायदा नहीं हुआ। दुबई पोर्ट बंद होने से चावल ओमान के सोहर बंदरगाह पर चावल भेजकर आपूर्ति की जा रही है। शारजाह के बंदरगाह पर भी चावल भेजा जा रहा है। यहां से चावल सड़क मार्ग से कई देशों को जाता है। हालांकि सड़क मार्ग से भाड़े पर आने वाला खर्च खरीदार स्वयं ही वहन कर रहा है, लेकिन दुबई के बजाय ओमान भेजने पर व्यापारी को अधिक माल भाड़ा खर्च करना पड़ रहा है।
डीएस एक्सपोर्ट के मालिक अमित अग्रवाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में विश्वसनीयता बनाए रखने को नुकसान उठाकर भी आपूर्ति की जा रही है। युद्ध के समय प्रति कंटेनर 2800 रुपये माल भाड़ा पहुंच गया था। सीजफायर के बाद यह दो हजार डालर आ गया है। जब हालात सामान्य थे। उस समय यह भाड़ा 600 से 700 डाॅलर था। कारोबारियों को जल्द ही हालात सामान्य होने की उम्मीद है। संवाद