सूबे में शासन चाहे किसी भी पार्टी का हो, लेकिन अपने शहर की समस्याएं कभी खत्म होने का नाम नहीं लेती। छह दशक में दो दर्जन से अधिक चेयरमैन बने लेकिन शहर की सबसे अहम समस्या कूड़ा निस्तारण पर कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। सड़कों के किनारे बने अस्थाई डलावघर जी का जंजाल बने हुए हैं। आधी-आधी सड़कों पर फैला कूड़ा और इससे उठती दुर्गंध हर किसी को परेशान कर रही है। अमर उजाला ने मंगलवार को शहर में सफाई व्यवस्था का जायजा लिया तो कुछ यूं तस्वीर नजर आई।
स्टेडियम रोड बना डलावघर
स्टेडियम रोड पर कई नामचीन अस्पताल हैं। इसी मार्ग से ज्यादातर स्कूली बच्चों को आना जाना होता है। गौहनिया चौराहे से सुनगढ़ी थाने तक कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। इसमें अस्पतालों का कचरा भी शामिल है। यहां कूड़ा उठता तो है लेकिन कोई निर्धारित समय नहीं है।
सुबह स्टेशन रोड से गुजरना मुश्किल
स्टेशन रोड स्थित राजाबाग कालोनी व मधुवन कालोनी में बने अस्थाई डलावघर हर किसी के लिए मुसीबत का सबब बन रहे हैं। कूड़ा उठने का कोई समय निर्धारित न होने से यह आधी सड़क तक फैल जाता है। लोगों को इसी ढेर से होकर गुजरना पड़ता है।
तुलाराम का डलावघर बना मुसीबत
मोहल्ला तुलाराम में बड़े नाले के समीप कई साल से कूड़ा डाला जा रहा है। संकरी सड़क होने के चलते यह चारों तरफ फैल जाता है। इससे लोगों को इसके ऊपर से होकर गुजरना पड़ता है। इस डलावघर का कूड़ा कब उठता है, आसपास के लोगों को भी नहीं पता होता।
सड़क से गुजरना है तो नाक पर रखिए रुमाल
गैस चौरोहे से यशवंतरी देवी मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर एक कोल्डस्टोर के समीप कूड़ा डाला जाता है। यहां भी समय से कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर कूड़ा उठता भी है तो आधा अधूरा। इसकी वजह से सभी लोगों को नाक पर रुमाल रखकर आना जाना पड़ता है।
लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई
सफाई कर्मियों को सुबह आठ बजे से कूड़ा उठाने के निर्देश दिए गए है। कुछ स्थानों पर देर से कूड़ा उठाने की जानकारी मिली है। सफाई निरीक्षकों को निर्धारित समय के भीतर कूड़ा उठाने को कहा गया है, यदि कोताही बरती गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- प्रभात जायसवाल, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद