- गोरखपुर चिड़ियाघर की विशेषज्ञ टीम ने जांच में पकड़ीं खामियां
- शासन को भेजी रिपोर्ट, कमियां दूर होने के बाद ही होगा हैंडओवर
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। पूरनपुर रेंज के गोपालपुर वनखंड में 14.33 करोड़ रुपये की लागत से तैयार वन्यजीव रेस्क्यू एवं पुनर्वास केंद्र का संचालन शुरू होने से पहले ही अटक गया है। सुरक्षा और तकनीकी मानकों की जांच के लिए गोरखपुर चिड़ियाघर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने स्थलीय निरीक्षण में कुछ खामियां चिह्नित की हैं। टीम ने अपनी जांच आख्या शासन को भेज दी है। अब शासन के निर्देश के बाद ही केंद्र के हैंडओवर और संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
वन्यजीवों के लिए तैयार किए गए इस केंद्र का निर्माण चार चरणों में कराया गया है। यहां जंगल से रेस्क्यू किए जाने वाले बाघ, तेंदुए समेत अन्य हिंसक वन्यजीवों को रखा जाना है। ऐसे में केंद्र में सुरक्षा इंतजामों का वन्यजीवों के स्वभाव और उनकी शारीरिक क्षमता के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। इसी के चलते निर्माण पूरा होने के बाद विशेषज्ञों से तकनीकी सत्यापन कराया गया। बीते दिनों शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान, गोरखपुर के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने केंद्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उनके साथ पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह और कार्यदायी संस्था के अभियंता मौजूद रहे। टीम ने नाइट सेल के हाइड्रोलिक गेट, बाड़ों की जालीदार सुरक्षा, बाहरी फेंसिंग और ड्रेनेज सिस्टम समेत सुरक्षा से जुड़े विभिन्न इंतजामों की बारीकी से पड़ताल की। फील्ड डायरेक्टर पीपी सिंह ने बताया कि गोरखपुर प्राणि उद्यान की टीम ने स्थलीय सत्यापन पूरा कर अपनी जांच आख्या शासन को भेज दी है। प्राथमिक तौर पर कुछ छिटपुट कमियों की बात सामने आई है। शासन से विस्तृत रिपोर्ट और दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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खामियां दूर होने के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
तकनीकी सत्यापन के दौरान मिली कमियों को विशेषज्ञ टीम ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में दर्ज किया है। रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अब टाइगर रिजर्व प्रशासन को दिशा-निर्देश का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार, निर्माण एजेंसी को चिह्नित कमियां दूर करनी होंगी। इसके बाद ही केंद्र के हैंडओवर की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। यानी करोड़ों रुपये की लागत से तैयार केंद्र का संचालन फिलहाल तकनीकी जांच और सुधार कार्यों के बीच अटका हुआ है।